MITS कुलगुरु कार्यालय और बंगले पर रातोंरात लगे रहस्मयी झंडे…

यूँ तो शिक्षा के क्षेत्र में एमआईटीएस अपने आप में ही बहुत बड़ा नाम है जिसने देश को अब तक कई बड़े इंजीनियर दिए जिन्होंने ग्वालियर का मान विश्वपटल पर बढ़ाया लेकिन वर्तमान में एमआईटीएस संस्थान उच्च प्रबंधन के कुप्रबंधन के कारण खबरों में है।
जहां MITS कुलगुरु विवादों से घिरे हुए हैं वहीं संस्थान में कार्यरत दो प्लेसमेंट अधिकारियों में से एक प्लेसमेंट ऑफिसर जो अपनी कर्तव्यनिष्ठा और अपने संबंधो का प्रयोग कर कुछ कंपनियों से विद्यार्थियों को कैंपस प्लेसमेंट दिला पा रहे थे आखिरकार एमआईटीएस से वह होनहार प्लेसमेंट ऑफिसर भी इस्तीफा दे गया। उक्त प्लेसमेंट अधिकारी के इस्तीफा देने के बाद एक नव नियुक्त शिक्षक को प्लेसमेंट शाखा का प्रभार दिया गया है। यहां उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि संस्था में लगभग समस्त वरिष्ठ पद अब प्रभार के सहारे ही है प्राप्त जानकारी अनुसार पूर्व रजिस्ट्रार डॉक्टर ओपी पालीवाल की जून 2017 में सेवानिवृत्ति उपरांत आज लगभग 10 वर्षों से रजिस्ट्रार का सीधी भर्ती का पद प्रभारियों के सहारे है। डॉक्टर ओपी पालीवाल की सेवानिवृत्ति के बाद रजिस्ट्रार पद पर पूर्व में स्व. शैलेंद्र भदौरिया, प्रतेश जायसवाल, निखिल पालीवाल, प्रभाकर शर्मा प्रभारी रहे और अब फिर पुनः निखिल पालीवाल प्रभारी रजिस्ट्रार बने हुए हैं।
स्थापना शाखा से प्राप्त जानकारी अनुसार प्लेसमेंट अधिकारी ही नहीं बल्कि इस महीने दो अन्य महिला शिक्षकों ने भी इस्तीफा दे दिया है। वह भी तब छात्रों ने प्लेसमेंट में गिरावट को लेकर धरने प्रदर्शन के दौरान देर रात सौंपे गए ज्ञापन में चिंता जताई है। छात्रों द्वारा इस सम्बन्ध में mitsvoice नामक इंस्टाग्राम आईडी से कई पोस्ट भी अपलोड की गई।
वहीं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ब्रांच के कई छात्रों से जानकारी मिली है कि मेडम द्वारा कभी उनकी क्लास नहीं ली जाती है जबकि वह इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में मूलतः प्रोफेसर हैं परंतु कुलगुरु की धर्मपत्नी होने के चलते उन्हें विद्यार्थियों को पढ़ाने के कार्य में छूट देकर विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की स्टूडेंट फीडबेक फाइलें देखने और सिर्फ रुतबा दिखाने का विशेष कार्य दिया हुआ है।
खैर अभी कुलगुरु महोदय 6 जुलाई को प्रस्तावित, संभावित एक्जीक्यूटिव काउंसिल बोर्ड की मीटिंग में अपने बचाव के लिए दलीलें और दूसरों के सिर पर ठीकरा फोड़ने की व्यवस्थाओं में जुट गए है। इसी क्रम में उनके द्वारा एबीवीपी द्वारा धरने के दौरान देर रात्रि को प्राप्त किए गए ज्ञापन में फीस वृद्धि से जुड़ी कुछेक मांगे भी मान ली गई हैं।
छात्रों द्वारा इंस्टाग्राम के माध्यम से प्रसारित की गई पोस्ट


सूत्रों से खबर है कि 31 मई 2026 को सेवानिवृत हो चुके श्री पीपली ( सांकेतिक ) को 50 हजार रु प्रतिमाह एवं बड़ा मीडिया मैनेजमेंट फंड देने का ऑफर देकर कार्य शुरू करवाया गया था हालांकि श्री पीपली ( सांकेतिक ) छात्रों के धरने प्रदर्शन के दौरान 6 सोशल मीडिया इंफ्लूएंसरो में कथित लिफाफों के बंटवारे के कारण एक तरफ साहब के पक्ष में मीडिया मैनेज करने में असफल रहे वहीं कथित लिफाफों के बंटवारे से वह स्वयं भी अब मीडिया के निशाने पर हैं। खबर है कि उन्हें सेवानिवृत्ति उपरांत कथित रूप से संविदा पर रखा गया है और सेक्यूरिटी का चार्ज दिए जाने की चर्चा है
जबकि संस्था की चाकचौबंद के लिए सेक्यूरिटी कंपनी अपना कार्य कर ही रही है और उनके सुपरवाइजर गार्ड्स पर निगाह भी रखते है फिर आखिर सेवानिवृत्ति पश्चात पीपली ( सांकेतिक ) जी की नियुक्ति से संस्था पर आर्थिक बोझ डालकर सिर्फ चहेतो को उपकृत किया है।
यही नहीं साहब एक तरफ जहां उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थान में जिम्मेदार कुर्सी पर विराजमान है वहीं कुछ दिन पहले शुक्रवार 19 जून को रातोंरात किसी विशेष क्रिया अनुष्ठान के बाद बंगले और कार्यालय के ऊपर लगाए गए विशेष झंडों को लेकर तरह तरह की चर्चा है।
वहीं साहब के ही एक घनिष्ठ साथी जो पूर्व में परीक्षा नियंत्रक वर्तमान में अपनी सुपुत्री के पास विदेश दौरे पर होते हुए भी चम्बल ब्रेकिंग से संपर्क किया और चटखारे लेते हुए साहब की मार्कशीट और डिग्री की छायाप्रति के संबंध में व्यंग्य करते रहे उन्होंने ताज्जुब इस बात पर जताया कि इनकी शैक्षणिक दस्तावेज की प्रति मीडिया तक कैसे पहुंची ?
कैसे पहुंची कैसे नहीं यह बात अब व्यर्थ है मुद्दे की बात यह है कि दोयम दर्जे की शैक्षणिक योग्यता के चलते वह इस पद के लिए अपात्र है सिंधिया इंजीनियरिंग कॉलेज सोसायटी के चेयरमैन, सचिव सहित एक्जीक्यूटिव बोर्ड मेंबर्स आखिर कैसे शिक्षण संस्था के विद्यार्थियों के भविष्य को ऐसे कैसे अपात्र हाथों में दे रखें हैं।




