ABVP का दावा आंदोलन के आगे झुका MITS प्रबंधन: बढ़ी हुई फीस में 18.18% की भारी कटौती, एमआईटीएस प्रबंधन ने स्टूडेंट्स से कहा परिवर्तन किया ही नहीं था…

ग्वालियर। माधव इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (MITS) कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) का छात्रहित में किया गया संघर्ष रंग लाया है। गत 16 जून को कॉलेज परिसर में हुए उग्र प्रदर्शन में रामकृष्ण नगर मंत्री अर्जुन श्रीवास्तव मुख्य रूप से उपस्थित रहे और अग्रणी भूमिका निभाई। इसी आंदोलन के भारी दबाव में आकर आज 26 जून को कॉलेज प्रबंधन ने बढ़ी हुई फीस में 18.18 प्रतिशत की बड़ी कटौती करने का आधिकारिक फैसला सुनाया है।
4 वर्षों में 111% से ज्यादा बढ़ा दी गई थी फीस:-
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा पूर्व में सौंपे गए मांग पत्र के आंकड़ों के अनुसार, सत्र 2022-23 में जो कुल पाठ्यक्रम शुल्क ₹4,16,000 था, उसे आगामी सत्र 2026-27 के लिए सीधे ₹8,80,000 कर दिया गया था। पिछले सत्र (2025-26) के ₹6,25,800 के मुकाबले आगामी सत्र में यह सीधे 28.8% से अधिक की अवैध वृद्धि थी। नियमानुसार प्रतिवर्ष अधिकतम 10% ही शुल्क बढ़ाया जा सकता है, लेकिन प्रबंधन ने पिछले 4 वर्षों में कुल 111.54% शुल्क बढ़ाकर छात्रों पर भारी आर्थिक बोझ डाल दिया था।
आंदोलन के आगे झुका प्रशासन:-

इस मनमानी के खिलाफ 16 जून को अर्जुन श्रीवास्तव एवं परिषद के कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में छात्रों ने कॉलेज में विशाल आंदोलन किया था, जिसके बाद प्रबंधन ने 8 जुलाई तक का समय मांगा था। परंतु, निरंतर बने दबाव के कारण कॉलेज प्रशासन समय सीमा से पहले ही आज झुक गया। फीस कटौती के अलावा पुस्तकालय शुल्क (₹3500/सेमेस्टर), लर्निंग रिसोर्सेज शुल्क (₹5000) में विसंगतियों, प्लेसमेंट में गिरावट और अन्य अनुचित शुल्कों (जैसे अनावश्यक पार्किंग, प्रोफेशनल व होलिस्टिक डेवलपमेंट फीस) से जुड़ी अन्य मांगों पर भी विचार करने का भरोसा दिया गया है।
इस ऐतिहासिक सफलता पर रामकृष्ण नगर मंत्री अर्जुन श्रीवास्तव ने कहा, “नियमों को ताक पर रखकर की गई 28.8% की फीस वृद्धि छात्रों के साथ सरासर अन्याय था। 16 जून को मैदान में उतरकर जो हुंकार हमने भरी थी, आज उसी छात्र शक्ति की बदौलत प्रबंधन को घुटने टेकने पड़े हैं। यह जीत कॉलेज के हर एक छात्र और अभिभावक की जीत है।”
इस बड़ी राहत के बाद MITS के आम छात्रों ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद एवं मैदान में डटे कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया है।
वहीं दूसरी तरफ एमआईटीएस प्रबंधन ने एबीवीपी के दावे से इतर इंटरनल मैसेजिंग सिस्टम से छात्रों को संबोधन कर कहा कि पूर्व से अध्यनरत छात्रों की फीस में कोई परिवर्तन किया ही नहीं गया था।

स्पष्ट है कि जिस प्रकार कुलगुरु महोदय उच्च प्रबंधन को गुमराह करने की तरकीब लगाने में महारथी है उसी प्रकार अब एबीवीपी के आंदोलन के बाद जहां उन्हें आश्वासन दिया गया वहीं छात्रों से स्पष्ट तौर पर कहा गया कि फीस में कोई परिवर्तन नहीं किया गया तो फिर बड़ी हुई फीस संरचना के फीस स्ट्रक्चर संस्था की वेबसाइट पर कैसे उपलब्ध थे जिसे 16 जून के दिन धरने के दौरान हटा लिया गया था जबकि स्वयं कुलगुरु अपने एयरलडीशंड कमरे से बाहर नहीं निकले थे और देर रात निकले भी तो 6 जुलाई को एक्जीक्यूटिव बॉडी की मीटिंग में प्रस्ताव रखने की बात कहते रहे जबकि फीस संरचना का निर्धारण स्वयं उनकी देखरेख में ही अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा ही किया जाता है।
हालांकि अब भी अन्य फीस के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है सिर्फ आश्वाशन देकर डिप्लोमेटिक तरीके से जहां एबीवीपी को मनाने का पांसा फेंका गया है वहीं एबीवीपी से छात्रों को दूर रहने की कूटनीति खेली गई है।



