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छात्रावास खुले नहीं, छात्राएं गायब; 150 सीटर हॉस्टलों में सन्नाटा, फिर भी बिल-वाउचर की तैयारी पर सवाल…

16 जून से संचालन के आदेश, 26 जून तक कई छात्रावासों में नहीं पहुंची एक भी छात्रा; निरीक्षण में ताले, गंदगी और स्टाफ की अनुपस्थिति उजागर...

               आनंद द्विवेदी, मुरैना,

मुरैना। जिले के शासकीय कन्या छात्रावासों की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शासन के निर्देशानुसार 16 जून से छात्रावासों का संचालन शुरू हो जाना था, लेकिन 26 जून तक जिले के कई 150 सीटर छात्रावासों में एक भी छात्रा नहीं पहुंची। हैरानी की बात यह है कि कई छात्रावासों में ताले लटके मिले, कहीं वार्डन और स्टाफ नदारद रहे तो कहीं परिसर में गंदगी का अंबार दिखाई दिया। इसके बावजूद बिल-वाउचर तैयार किए जाने की चर्चाओं ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद टीम ने जिले के कई छात्रावासों का मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। सबसे पहले झुंडपुरा स्थित छात्रावास का निरीक्षण किया गया, जहां केवल मुख्य गेट खुला मिला। परिसर में न तो कोई छात्रा मौजूद थी और न ही वार्डन दिखाई दीं।

इसके बाद टीम करीब 18 किलोमीटर दूर कैलारस कस्बे के री जॉनी रोड स्थित छात्रावास पहुंची। यहां मुख्य द्वार पर ताला लटका मिला और परिसर पूरी तरह सुनसान था। मौके पर सहायक संचालक एवं बीईओ (BEO) से चर्चा की गई। अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान स्वीकार किया कि छात्रावास में न कोई छात्रा मौजूद है और न ही वार्डन। उनका कहना था कि छात्रावास का संचालन 1 जुलाई से शुरू किया जाएगा।

इसके बाद टीम परसोटा गांव स्थित छात्रावास पहुंची। यहां दोपहर करीब 11 बजे निरीक्षण के दौरान न छात्राएं मिलीं और न ही कोई स्टाफ मौजूद था। छात्रावास परिसर में गंदगी फैली हुई थी और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि लंबे समय से साफ-सफाई एवं नियमित देखरेख नहीं हुई है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई छात्रावासों में अधीक्षकों एवं वार्डनों का व्यवहार भी छात्राओं के प्रवेश में बाधा बन रहा है। वहीं हर वर्ष छात्राओं की संख्या कम होने के बावजूद खर्चों के नाम पर बिल-वाउचर लगाए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद छात्रावासों का संचालन समय पर शुरू नहीं हुआ, तो जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की। यदि छात्राएं नहीं हैं और छात्रावास बंद पड़े हैं, तो फिर खर्चों की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है ?

जिला परियोजना समन्वयक (DPC) हरीश तिवारी से भी इस संबंध में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर छात्रावासों की निगरानी और संचालन को लेकर विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई की गई।

वहीं जिला शिक्षा अधिकारी भगवान सिंह इंदौलिया ने कहा कि यदि किसी छात्रावास में एक भी छात्रा नहीं है तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और ऐसे मामलों में बिल-वाउचर नहीं लगाए जाएंगे। हालांकि उनके इस बयान के बाद भी विभागीय निगरानी और जवाबदेही को लेकर कई सवाल बरकरार हैं।

अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग बंद पड़े छात्रावासों और कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है या फिर हर वर्ष की तरह यह मामला भी फाइलों तक सीमित रह जाएगा।

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