आरोप गंभीर, कार्रवाई अधूरी, प्रशासन पर आरोपों का बोझ या सत्ता का संरक्षण?
कई शिकायतें लंबित "डॉ. अक्षय निगम" फिर डीन पद की रेस में सबसे आगे भोपाल में चर्चाएं तेज।

चम्बल ब्रेकिंग/गिर्राज रजक, ग्वालियर,
ग्वालियर। मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित गजराराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) के पूर्व डीन एवं रेडियोथेरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. अक्षय कुमार निगम एक बार फिर विवादों में हैं। उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितता, पद के दुरुपयोग, खरीद प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी तथा आयुष्मान भारत योजना के संचालन में लापरवाही सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
प्राप्त दस्तावेजों और शिकायतों के अनुसार, डॉ. निगम के कार्यकाल में स्किल लैब के लिए सामग्री खरीदी, निविदा प्रक्रिया और भुगतान संबंधी मामलों में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि खरीद प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पूर्ण पालन नहीं किया गया तथा सामग्री की गुणवत्ता, दरों और भुगतान प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
इतना ही नहीं, शिकायतों में शासकीय राशि के उपयोग में कथित अनियमितताओं और प्रशासनिक अधिकारों के दुरुपयोग के आरोप भी शामिल हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में स्वीकृत राशि और खरीदी गई सामग्री के मूल्य में अंतर पाया गया, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई।

मामले को लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग को भी शिकायतें भेजी गई थीं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, संबंधित मामलों में जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
शिकायतकर्ता ने डॉ. निगम के विरुद्ध पूर्व में दर्ज प्रकरणों और न्यायालयीन रिकॉर्ड की भी जांच कराने की मांग की है। साथ ही आयुष्मान भारत योजना से जुड़े मामलों में मरीजों के उपचार और प्रकरणों के निस्तारण में कथित लापरवाही के आरोपों की भी जांच की मांग उठाई गई है।
वहीं, गजराराजा मेडिकल कॉलेज की खरीद प्रक्रिया को लेकर गठित जांच समिति की रिपोर्ट में भी करोड़ों रुपये की मशीनों और अन्य सामग्री की खरीद में नियमों के पालन को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट में सीमित निविदाएं, वारंटी संबंधी कमियां, अग्रिम भुगतान तथा अधिक कीमत पर खरीद जैसी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्षों से शिकायतें और जांच रिपोर्ट सामने आने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं की गई
अब देखना होगा कि इस खबर चलने के बाद प्रशासन इन पर कार्रवाई करेगा या फिर मौन बना रहेगा?


