खनियांधाना में प्रशासन का महा-एक्शन: अग्नि सुरक्षा में फेल 5 कोचिंग सेंटर सील, प्राइवेट दुकान चला रहे सरकारी गुरुजियों में मचा हड़कंप

खनियांधाना (शिवपुरी)। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के खनियांधाना में असुरक्षित रूप से संचालित हो रहे कोचिंग सेंटरों पर प्रशासन का बड़ा डंडा चला है। शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा के सख्त निर्देशों के बाद खनियांधाना तहसीलदार निशिकांत जैन ने प्रशासनिक अमले के साथ नगर के विभिन्न कोचिंग सेंटरों पर अचानक औचक छापेमारी की। इस दौरान शासन की गाइडलाइंस और अग्नि सुरक्षा मानकों का घोर उल्लंघन पाए जाने पर प्रशासन ने तत्काल 5 कोचिंग सेंटरों को सील करने की बड़ी कार्रवाई की है। इस महा-एक्शन से कोचिंग संचालकों में हड़कंप मच गया है।
सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने पर 5 कोचिंग सेंटर सील
तहसीलदार निशिकांत जैन के नेतृत्व में पहुंची प्रशासनिक टीम ने जब खनियांधाना के कोचिंग सेंटरों का बारीकी से निरीक्षण किया, तो वहाँ सुरक्षा के नाम पर भारी लापरवाही उजागर हुई। कई सेंटरों में न तो आपातकालीन निकासी (Emergency Exit) की व्यवस्था थी और न ही आग बुझाने के पर्याप्त उपकरण (Fire Extinguishers) मौजूद थे। छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करने वाले 5 कोचिंग सेंटरों को मौके पर ही सील कर दिया।
छापे के दौरान बड़ा खुलासा: प्राइवेट दुकान चला रहे सरकारी ‘गुरुजी’
इस प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान नगर में एक और बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ। जांच टीम को पता चला कि कई कोचिंग सेंटरों की आड़ में सरकारी स्कूलों में पदस्थ शिक्षक भी मोटी कमाई के चक्कर में धड़ल्ले से प्राइवेट कोचिंग कक्षाएं संचालित कर रहे हैं।
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सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल: अभी बीते रोज ही सांदीपनि विद्यालय में पदस्थ एक शासकीय शिक्षक का कोचिंग क्लास में पढ़ाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था।
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कार्रवाई की भनक लगते ही भागे शिक्षक: बुधवार को जैसे ही प्रशासन की टीम मुस्तैद हुई और छापेमारी की भनक लगी, वैसे ही संबंधित शासकीय शिक्षक आनन-फानन में अपने सेंटर पर ताला डालकर मौके से रफूचक्कर हो गए।
शिक्षा विभाग की भूमिका पर खड़े हुए गंभीर सवाल
प्रशासन के इस बड़े खुलासे के बाद अब सबसे बड़ा प्रश्न चिन्ह जिला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो गया है। नियमों के मुताबिक किसी भी शासकीय शिक्षक को निजी तौर पर व्यावसायिक कोचिंग पढ़ाने की अनुमति नहीं है। ऐसे में सरकारी तंत्र से वेतन लेने वाले ये गुरुजी लंबे समय से अपनी प्राइवेट दुकानें चमका रहे थे। अब देखना होगा कि प्रशासन की इस रिपोर्ट के बाद शिक्षा विभाग इन दागी और लापरवाह शासकीय शिक्षकों पर क्या और कितनी सख्त विभागीय कार्रवाई करता है




