ग्वालियर में नगर निगम की अनूठी पहल, एक रुपये में मिले टीवी-फ्रिज और बेड; जरूरतमंदों के खिले चेहरे

ग्वालियर में नगर निगम ने दीपावली के अवसर पर जरूरतमंद परिवारों के लिए अनूठी पहल की। ‘स्वच्छ दीवाली’ अभियान के तहत लोगों को मात्र एक रुपये में टीवी, फ्रिज, आरओ, डबल बेड और रूम हीटर जैसी उपयोगी वस्तुएं उपलब्ध कराई गईं। गुरुवार को बाल भवन में आयोजित वितरण कार्यक्रम में सामान लेने पहुंचे परिवारों के चेहरों पर खुशी नजर आई। किसी के लिए यह नया मनोरंजन का साधन था तो किसी के लिए घर की जरूरी सुविधा मिलने का अवसर।
एक रुपये में सामान पाकर जरूरतमंद परिवारों के चेहरे खिले
नगर निगम के अभियान के तहत बाल भवन में उपयोगी घरेलू सामान का वितरण किया गया। सामान लेने पहुंचे लोगों के लिए यह केवल एक रुपये में वस्तु खरीदने का मौका नहीं था, बल्कि घर की जरूरत पूरी होने की खुशी थी।
रूपसिंह स्टेडियम के पास रहने वाली ओमवती वाल्मीक अपने परिवार के लिए टीवी लेने पहुंचीं। मेंहदी वाले सैयद गोल पहाड़िया निवासी सुमन कुशवाह ने फ्रिज चुना। इरफान खान ने पलंग खरीदा, जबकि भावना ने सर्दी के मौसम को देखते हुए एक रुपये में रूम हीटर लिया। सिकंदर कंपू निवासी ममता ने शुद्ध पानी पीने के लिए आरओ लिया। सामान मिलने के बाद कई लोग उसे सुरक्षित घर पहुंचाने की व्यवस्था करते दिखाई दिए।
निगम के अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ वितरण
सामग्री वितरण कार्यक्रम के दौरान निगमायुक्त अभिषेक चौधरी, अपर आयुक्त टी. प्रतीक राव और उपायुक्त एसबीएम मुकेश बंसल मौजूद रहे। कार्यक्रम में जरूरतमंद परिवारों को घरेलू उपयोग की वस्तुओं के साथ बच्चों को खिलौने भी दिए गए।
नगर निगम की इस पहल से लोगों को कम कीमत पर जरूरत का सामान मिला। वहीं, घरों में अनुपयोगी पड़ी वस्तुओं को किसी दूसरे परिवार के काम आने का अवसर भी मिला।
अभियान में शहरवासियों ने जमा कीं 25 हजार से अधिक वस्तुएं
नगर निगम ने दीपावली के दौरान घरों से निकलने वाली उपयोगी वस्तुओं को कचरे में जाने से बचाने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर को अभियान शुरू किया था। इस वर्ष शहरवासियों ने कुल 25,067 वस्तुएं जमा कराईं। पिछले साल यह संख्या करीब पांच हजार थी।
जमा की गई सामग्री में 21,318 कपड़े, 803 जोड़ी जूते, 844 बोतलें, 453 किताबें, 192 इलेक्ट्रॉनिक सामान, 192 खिलौने, 451 कंबल और अन्य उपयोगी वस्तुएं शामिल हैं।
इस अभियान के जरिए नगर निगम ने जरूरतमंद परिवारों तक उपयोगी सामान पहुंचाने के साथ पुनः उपयोग की संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। अभियान ने यह संदेश भी दिया कि एक घर में अनुपयोगी हो चुकी वस्तु किसी दूसरे परिवार की जरूरत पूरी कर सकती है।



