शादी का झांसा देकर दुष्कर्म मामले में आरोपी बरी, एमपी हाई कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला रखा बरकरार

ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। महिला की अपील खारिज करते हुए युगलपीठ ने मामले में सामने आए तथ्यों और महिला के बयानों पर विचार किया। अदालत के सामने यह तथ्य आया कि महिला को आरोपी के विवाहित होने और उसकी दो बेटियां होने की जानकारी पहले से थी।
निचली अदालत के फैसले को महिला ने दी थी चुनौती
मामले में ग्वालियर के 17वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 13 जनवरी 2025 को आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 366, 376(2)(एन) और 506 के तहत लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया था। महिला ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उसकी ओर से तर्क दिया गया कि उसे आरोपी के विवाहित होने की जानकारी नहीं थी और उसने शादी करने के वादे को वास्तविक माना था।
जिरह में सामने आई आरोपी के विवाह की जानकारी
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने महिला के जिरह में दिए गए बयान रखे गए। महिला ने स्वीकार किया था कि वह जनवरी 2019 से आरोपी को जानती थी और उसे उसकी पत्नी तथा दो बेटियों के बारे में जानकारी थी। उसने यह भी माना कि परिचय के समय उसे आरोपी के शादीशुदा होने का पता था।
युगलपीठ ने अपील की खारिज
न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए महिला की अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही निचली अदालत द्वारा आरोपी को बरी करने का फैसला बरकरार रहा।




