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ग्वालियर: MITS प्रबंधन पर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर आरोप, उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज; आधिकारिक बयान का इंतजार

ग्वालियर के प्रतिष्ठित माधव प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (MITS) के कुलगुरु आर.के. पंडित और कॉलेज प्रशासन एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। संस्थान के छात्रों, शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों ने प्रबंधन कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए विभिन्न स्तरों पर शिकायतें दर्ज कराई हैं। छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल में रहने और भोजन की व्यवस्था बेहद लचर है। निर्धारित मेनू और भारी-भरकम फीस वसूलने के बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। इसके अलावा, छात्रों ने करियर और प्लेसमेंट सेल पर भी आरोप लगाया है कि कॉलेज में नामी कंपनियां नहीं आ रही हैं, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकार में लटक गया है।

लोकायुक्त और शिक्षा मंत्रालय तक पहुंची शिकायत: ट्रांसफर और प्रमोशन में भी गड़बड़ी का दावा

यह विवाद सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि कॉलेज के स्टाफ में भी आंतरिक असंतोष गहरा गया है। कुछ शिक्षकों और कर्मचारियों ने ट्रांसफर (स्थानांतरण), कार्यभार के आवंटन और पदोन्नति (प्रमोशन) की प्रक्रियाओं में पक्षपात और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनके वित्तीय भुगतानों और सेवा लाभों में जानबूझकर देरी की जा रही है। इस बीच, अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर द्वारा इस पूरे मामले की शिकायत लोकायुक्त, केंद्रीय जांच एजेंसियों और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से किए जाने की खबर है। शिकायतों में संस्थान के भीतर बड़े पैमाने पर वित्तीय और प्रशासनिक हेरफेर की बात कही गई है और एक स्वतंत्र उच्च स्तरीय कमेटी से जांच कराने की मांग की गई है।

प्रबंधन की चुप्पी और सिंधिया का संदर्भ: निष्पक्ष जांच से ही साफ होगी स्थिति

इन तमाम गंभीर आरोपों पर एमआईटीएस (MITS) प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई भी विस्तृत या आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। हालांकि, पूर्व में संस्थान के एक प्रतिनिधि ने इन शिकायतों को निजी स्वार्थ से प्रेरित बताया था, लेकिन मौजूदा विवाद पर प्रशासन की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया आनी अभी बाकी है। दूसरी ओर, संस्थान के संरक्षक मंडल से जुड़े केंद्रीय मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरफ से भी इस संवेदनशील विषय पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया है। शिक्षा जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि संस्थान की साख और शैक्षणिक गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए उच्च शिक्षा नियामक संस्थाओं को तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है। इस मामले में जैसे ही प्रबंधन या संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आएगा, उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

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