ग्वालियर हाईकोर्ट से बर्खास्त निगम कर्मचारी को राहत, अब मिलेगा 1.75 लाख रुपये मुआवजा

नौकरी में बहाली के बजाय मुआवजे का विकल्प बरकरार, अदालत ने राशि 1.50 लाख से बढ़ाकर 1.75 लाख रुपये की
ग्वालियर। नगर निगम से बर्खास्त किए जाने के मामले में लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे मनोज सिंह राणा को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ से राहत मिली है। न्यायालय ने नौकरी में बहाली के बजाय दिए जाने वाले मुआवजे की राशि 1.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.75 लाख रुपये कर दी है।
दो न्यायाधीशों की पीठ ने सुनाया फैसला
न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की युगलपीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए मुआवजे में 25 हजार रुपये की अतिरिक्त वृद्धि को उचित माना। इसके बाद मनोज सिंह राणा को मिलने वाली कुल मुआवजा राशि 1.75 लाख रुपये हो गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राशि नौकरी में बहाली के बदले दी जाएगी।
पांच लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजे की मांग
सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि सेवा समाप्त किए जाने की परिस्थितियों और अपने अधिकारों के लिए लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ने को देखते हुए पहले निर्धारित मुआवजा पर्याप्त नहीं है। इस आधार पर मुआवजे में पांच लाख रुपये की अतिरिक्त वृद्धि की मांग की गई थी। साथ ही, नौकरी में बहाली और पूरे पिछले वेतन का विकल्प भी रखा गया था।
अदालत ने 25 हजार रुपये बढ़ाना उचित माना
हाईकोर्ट ने मामले में प्रस्तुत दलीलों और उपलब्ध राहत के विकल्पों पर विचार करने के बाद मुआवजे में 25 हजार रुपये की वृद्धि की। इस फैसले के बाद मुआवजे की कुल राशि 1.75 लाख रुपये हो गई है। कर्मचारी को नौकरी पर वापस रखने के बजाय आर्थिक मुआवजा देने का विकल्प बरकरार रखा गया है।



