श्योपुर के सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर, कहीं प्रधानाध्यापक की चप्पलों से पिटाई तो कहीं ड्यूटी में सोते मिले शिक्षक

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अलग-अलग स्कूलों से सामने आए वीडियो और शिकायतों में कहीं शिक्षक ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में मिले, कहीं शिक्षिका मोबाइल चलाते नजर आईं तो कहीं स्कूल में शिक्षक दरी बिछाकर सोते दिखाई दिए। इसी बीच एक स्कूल में मध्यान्ह भोजन को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि स्वसहायता समूह की महिला ने प्रधानाध्यापक के साथ चप्पलों से मारपीट कर दी।
मध्यान्ह भोजन विवाद में प्रधानाध्यापक की चप्पलों से पिटाई
मामला शासकीय माध्यमिक उर्दू गांधी विद्यालय का बताया जा रहा है। यहां मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के बीच विद्यालय के प्रधानाध्यापक कमलजीत सिंह सिसोदिया के साथ मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने वाले समूह की महिला अध्यक्ष नशीर बानो द्वारा चप्पलों से मारपीट किए जाने का वीडियो सामने आया है।
बताया गया है कि प्रधानाध्यापक ने मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद समूह का संचालन करने वाली महिला ने वीडियो बनाकर प्रधानाध्यापक पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाए थे। दोनों पक्षों के बीच विवाद के बाद मामला मारपीट तक पहुंच गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।
ड्यूटी के समय दरी बिछाकर सोते नजर आए शिक्षक
दूसरा मामला जिले के सोंठवा शासकीय माध्यमिक विद्यालय का बताया जा रहा है। यहां प्रभारी शिक्षक लज्जाराम शर्मा का वीडियो सामने आया है, जिसमें वह ड्यूटी के दौरान स्कूल में दरी बिछाकर आराम करते नजर आ रहे हैं। ऐसे वीडियो सामने आने के बाद स्कूल में बच्चों की पढ़ाई और शिक्षकों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इससे पहले टर्राकलां संकुल क्षेत्र के एक विद्यालय में ड्यूटी के दौरान एक शिक्षक के शराब के नशे में मिलने की बात सामने आई थी। वहीं स्कूल निरीक्षण के दौरान एसडीएम गगनसिंह मीणा को एक शिक्षिका और उसका पति ड्यूटी समय में मोबाइल चलाते मिले थे। खबर में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई विद्यालयों में शिक्षक देरी से पहुंचते हैं।
शिकायतों और वीडियो के बाद शिक्षा विभाग की निगरानी पर सवाल
मध्यान्ह भोजन को लेकर पहले से शिकायतें होने के बावजूद समय रहते विवाद का समाधान नहीं होने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं लगातार सामने आ रहे वीडियो और शिकायतों के बीच सरकारी स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और व्यवस्थाओं की निगरानी की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों की है। लेकिन सामने आ रहे मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि स्कूलों का नियमित निरीक्षण और मॉनिटरिंग किस स्तर पर हो रही है।
जिला शिक्षा अधिकारी यश जैन से मामले को लेकर संपर्क करने का प्रयास किया गया। उन्हें मोबाइल फोन पर दो बार कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।




