शिक्षा के मंदिरों में मान्यता के नाम पर बड़ा खेल ? संयुक्त संचालक लोक शिक्षण ग्वालियर पर गंभीर आरोप, करोड़ों के घोटाले की चर्चा तेज…

शिक्षा के मंदिरों में मान्यता के नाम पर बड़ा खेल ? संयुक्त संचालक लोक शिक्षण ग्वालियर पर गंभीर आरोप, करोड़ों के घोटाले की चर्चा तेज…
ग्वालियर। लोक शिक्षण संभाग ग्वालियर के वर्तमान संयुक्त संचालक पर निजी विद्यालयों को कथित रूप से नियमों के विपरीत नवीन एवं नवीनीकरण मान्यताएं प्रदान करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार ग्वालियर जिले सहित पूरे संभाग में ऐसे अनेक हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते, इसके बावजूद उन्हें मान्यता जारी कर दी गई।
जानकारी के अनुसार कई विद्यालयों में न तो पर्याप्त खेल मैदान उपलब्ध हैं, न ही प्रशिक्षित शिक्षक हैं और न ही मान्यता नियमों के अनुरूप भवन व्यवस्था है। इसके बावजूद कक्षा 9वीं से 12वीं तक की मान्यताएं जारी किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में कक्षा 1 से 12 तक संचालित विद्यालयों के लिए लगभग 21,780 वर्गफुट भूमि आवश्यक होती है। वहीं कृषि संकाय संचालित करने वाले विद्यालयों के लिए कम से कम एक एकड़ कृषि भूमि विद्यालय परिसर से एक किलोमीटर की परिधि में होना अनिवार्य है। आरोप है कि इन आवश्यक मानकों की अनदेखी कर बड़ी संख्या में विद्यालयों को मान्यता प्रदान की गई।
सूत्रों का यह भी दावा है कि नवीन एवं नवीनीकरण मान्यताओं के लिए नियमानुसार विद्यालयों का भौतिक निरीक्षण कराया जाना चाहिए। इसके लिए संयुक्त संचालक कार्यालय को किसी सक्षम अधिकारी या कर्मचारी को विद्यालय भेजकर स्थल निरीक्षण कराना होता है, जिसके आधार पर रिपोर्ट तैयार होती है। लेकिन आरोप है कि कई मामलों में बिना निरीक्षण के ही कार्यालय में बैठे-बैठे मान्यताओं को मंजूरी दे दी गई। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर मामला माना जाएगा।
“मान्यता के नाम पर रेवड़ियां बांटने” जैसे आरोपों के बीच संभाग में करोड़ों रुपये के खेल की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि राज्य शासन और लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा पिछले कुछ वर्षों में जारी नवीन एवं नवीनीकरण मान्यताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो संभाग स्तर पर एक बड़े घोटाले का खुलासा हो सकता है।
सूत्रों के अनुसार वर्तमान संयुक्त संचालक के पूर्व कार्यकाल (2017 से 2020) के दौरान भी कई विद्यालयों को कथित रूप से निर्धारित मापदंड पूरे किए बिना मान्यताएं जारी की गई थीं। इसके अलावा उस अवधि में हुई कुछ अनुकंपा नियुक्तियां भी विवादों में रही थीं।
विश्वस्त सूत्रों की मानें तो वर्तमान कार्यकाल से जुड़े कुछ मामलों की जांच भी चल रही है। इसके बावजूद वे पुनः ग्वालियर संभाग में पदस्थ होने में सफल रहे। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या भोपाल स्थित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इन आरोपों पर संज्ञान लेकर व्यापक जांच कराएंगे, या फिर मान्यता संबंधी व्यवस्थाओं पर उठ रहे सवाल यूं ही बने रहेंगे।




