27% ओबीसी आरक्षण पर हाई कोर्ट में सुनवाई जारी, सरकार से मांगा आरक्षण निर्धारण का आधार

मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई सातवें दिन भी जारी रही। जबलपुर स्थित हाई कोर्ट की विशेष युगलपीठ के समक्ष ओबीसी आरक्षण के समर्थन में दायर याचिकाओं पर बहस हुई। हालांकि बहस पूरी नहीं हो सकी और अब मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे निर्धारित की गई है।
सरकार से पूछा गया आरक्षण तय करने का आधार
ओबीसी पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि राज्य सरकार अब तक यह स्पष्ट नहीं कर सकी है कि विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण का प्रतिशत किस संवैधानिक, सामाजिक और प्रशासनिक आधार पर निर्धारित किया गया। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि पर्याप्त प्रतिनिधित्व का आकलन किस प्रकार किया गया, इसका भी स्पष्ट जवाब सरकार के पास नहीं है।
ओबीसी आबादी और आरक्षण प्रतिशत का मुद्दा उठा
सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने दलील दी कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की आबादी लगभग 51 प्रतिशत बताई जाती है, जबकि लंबे समय तक उन्हें केवल 14 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। वहीं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए निर्धारित आरक्षण प्रतिशत का भी उल्लेख करते हुए समानता के सिद्धांत का हवाला दिया गया।
संवैधानिक मानकों पर आरक्षण तय करने की मांग
ओबीसी पक्ष ने कहा कि आरक्षण का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रावधानों, वस्तुनिष्ठ आंकड़ों और पर्याप्त प्रतिनिधित्व जैसे मानकों के आधार पर होना चाहिए। अदालत से मांग की गई कि सरकार इस संबंध में स्पष्ट और ठोस आधार प्रस्तुत करे।
ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। ओबीसी पक्ष ने तर्क दिया कि संविधान के तहत ईडब्ल्यूएस आरक्षण सभी वर्गों के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए है, लेकिन राज्य में इसका लाभ सीमित रूप से दिया जा रहा है। साथ ही ईडब्ल्यूएस आरक्षण के क्रियान्वयन के तरीके पर भी सवाल उठाए गए।



