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संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, ग्वालियर संभाग पर उठे सवाल: शिक्षिका को सौंपे गए महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व, मान्यता कार्यों को लेकर बढ़ा विवाद

           गिर्राज रजक, ग्वालियर,

ग्वालियर। लोक शिक्षण संभाग ग्वालियर कार्यालय एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। इस बार मामला एक माध्यमिक शिक्षिका को शैक्षणिक कार्यों से अलग रखकर महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपे जाने से जुड़ा है। आरोप है कि शासन के नियमों और विभागीय व्यवस्था को दरकिनार करते हुए अंग्रेजी विषय की माध्यमिक शिक्षिका श्रीमती गौरी तिवारी को लंबे समय से कार्यालयीन कार्यों में लगाया गया है, जबकि उन्हें किसी विद्यालय में विद्यार्थियों को शिक्षण कार्य कराना चाहिए था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार श्रीमती गौरी तिवारी को कथित रूप से उनके मूल कैडर और पद की प्रकृति से अलग सहायक सांख्यिकी अधिकारी के रूप में आगामी आदेश तक कार्य करने की जिम्मेदारी दी गई। इसके अलावा उन्हें प्रभारी अधिकारी (मान्यता) जैसे महत्वपूर्ण दायित्व भी सौंपे गए, जिसके अंतर्गत हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों की मान्यता संबंधी प्रक्रियाओं का संचालन शामिल बताया जाता है।

2025-26 की मान्यता प्रक्रिया में भी रही सक्रिय भूमिका

सूत्रों के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2025-26 में विद्यालयों की मान्यता संबंधी कार्यवाही भी वर्तमान संयुक्त संचालक अरविंद सिंह के कार्यकाल में श्रीमती गौरी तिवारी के माध्यम से संचालित कराई गई। बताया जा रहा है कि मान्यता से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों, परीक्षण प्रक्रियाओं और कार्यालयीन समन्वय में उनकी प्रमुख भूमिका रही।
इसी बिंदु को लेकर विभागीय कर्मचारियों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। सवाल उठाया जा रहा है कि जब कार्यालय में सहायक संचालक, प्रभारी अधिकारी एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारी उपलब्ध हैं, तब एक माध्यमिक शिक्षिका को इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां क्यों और किस आधार पर सौंपी गईं।

प्राचार्यों की बैठकों में भी प्रभावी उपस्थिति

सूत्रों का दावा है कि श्रीमती गौरी तिवारी संभागीय स्तर पर आयोजित प्राचार्यों की समीक्षा बैठकों में भी नियमित रूप से उपस्थित रहती हैं और कई मामलों में समीक्षा प्रक्रिया का संचालन या समन्वय करती दिखाई देती हैं। इस स्थिति को लेकर भी विभाग के भीतर असंतोष की चर्चा है। कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों का मानना है कि एक माध्यमिक शिक्षिका का वरिष्ठ प्राचार्यों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के बीच इस प्रकार प्रभावी भूमिका में दिखाई देना विभागीय पदानुक्रम और प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

मान्यता शाखा को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म

विद्यालय मान्यता से जुड़े कार्यों को लेकर पहले भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अब सूत्रों द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि मान्यता शाखा में होने वाले कार्यों पर श्रीमती गौरी तिवारी का विशेष प्रभाव बना हुआ है। कुछ लोगों ने मान्यता संबंधी प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं और आर्थिक गड़बड़ियों की आशंका भी व्यक्त की है।
हालांकि यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि इन आरोपों की अब तक किसी जांच एजेंसी या सक्षम विभागीय प्राधिकरण द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही इस संबंध में कोई जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है।

शिक्षक की कमी के बीच विद्यालय से बाहर पदस्थापना पर सवाल

शिक्षा विभाग में लगातार शिक्षकों की कमी और विषय विशेषज्ञों की आवश्यकता को लेकर चर्चा होती रही है। ऐसे में अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषय की शिक्षिका का वर्षों तक विद्यालयीन शिक्षण कार्य से दूर रहना भी सवालों के घेरे में है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि किसी शिक्षक की सेवाएं प्रशासनिक कार्यों में ली भी जाती हैं तो उसके लिए स्पष्ट नियम, आदेश और औचित्य होना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
जांच और जवाबदेही की उठी मांग पूरा मामला सामने आने के बाद विभागीय हलकों में निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है। वही कर्मचारियों का कहना है कि किसी शिक्षिका को नियमों के विपरीत प्रशासनिक पद और अधिकार दिए गए हैं तो इसमें वर्तमान संयुक्त संचालक अरविंद सिंह ने घोर लापरवाही की है।

 

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