ग्वालियर में हाईवे हादसे रोकने की तैयारी, बनेगी एसओपी; ई-चालान और जीपीएस से होगी निगरानी

ग्वालियर: राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क हादसों को रोकने के लिए अब ग्वालियर में मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी तैयार की जा रही है। जिला प्रशासन और पुलिस ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। प्रस्तावित व्यवस्था में उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली, जीपीएस और ई-चालान के जरिए हाईवे की निगरानी के साथ अवैध पार्किंग पर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की ओर से इस संबंध में एडीएम ग्वालियर को पत्र भी भेजा गया है।
हाईवे पर भारी वाहनों की पार्किंग पर सख्ती
प्रस्तावित एसओपी के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग के कैरिज-वे या पक्के शोल्डर पर भारी या व्यावसायिक वाहनों को खड़ा करने अथवा रोकने की अनुमति नहीं होगी। वाहनों को केवल निर्धारित ले-बाय या मार्ग के किनारे उपलब्ध सुविधायुक्त स्थानों पर ही रोका जा सकेगा।
नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर ई-चालान के माध्यम से कार्रवाई की जाएगी। हाईवे पर अवैध पार्किंग रोकने और निगरानी मजबूत करने के लिए राज्य पुलिस तथा परिवहन विभाग की हाईवे निगरानी पेट्रोलिंग टीमें भी गठित की जाएंगी।
जीपीएस और उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली से निगरानी
नई व्यवस्था में एनएचएआई के 24 घंटे संचालित पेट्रोलिंग वाहनों के अलावा पुलिस और परिवहन विभाग की निगरानी टीमें भी सक्रिय रहेंगी। इन टीमों को अधिकतम 50 किलोमीटर के अंतराल पर तैनात किए जाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। पेट्रोलिंग वाहनों में वाहन ट्रैकिंग उपकरण अनिवार्य होगा।
निगरानी व्यवस्था में उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली और जीपीएस का इस्तेमाल किया जाएगा। ग्वालियर की एसओपी में स्थानीय हाईवे, दुर्घटना संभावित स्थानों, पेट्रोलिंग व्यवस्था और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया को शामिल किया जाएगा।
34 मौतों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने लिया था स्वतः संज्ञान
राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी जिलों में नवंबर 2025 में लगातार हुए सड़क हादसों में 34 लोगों की मौत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 10 नवंबर 2025 को मामले में स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध पार्किंग, सड़क किनारे होने वाली गतिविधियों और निगरानी व्यवस्था को लेकर राज्यों में मानक प्रक्रिया तैयार करने की कवायद तेज हुई।
एसओपी के क्रियान्वयन में एनएचएआई, पुलिस और परिवहन विभाग की जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं। इन एजेंसियों की टीमें हाईवे पर अवैध पार्किंग, सड़क पर खड़े भारी वाहनों और यातायात में बाधा बनने वाली गतिविधियों की पहचान कर कार्रवाई करेंगी। प्रस्तावित व्यवस्था में हादसे के बाद कार्रवाई के बजाय जोखिम वाले स्थानों और यातायात उल्लंघनों की पहले से निगरानी पर जोर दिया जाएगा।



