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राजपरिवार से इतर MITS में “महाराज” और “महारानी” जैसा साम्राज्य

प्रसिद्ध MITS डीम्ड विश्विद्यालय इन दिनों कौतूहल का केंद्र बना हुआ है। लगातार कुलगुरु की प्रशासनिक एवं आर्थिक अनियमितताओं के बाद उनके शैक्षणिक दस्तावेज भी जगजाहिर हो चुके है जिससे उनका चयन करने वाले प्रबंधन पर ही सवालिया निशान लग गया है।

अन्य शिक्षण संस्था में डायरेक्टर पद हेतु भरे गए आवेदन में शैक्षणिक जानकारी संबंधी पत्रक

प्राप्त जानकारी अनुसार MiTS कुलगुरु आरके पण्डित ने इस संस्थान में डायरेक्टर रहने से पहले सामान्य प्रोफेसर थे और उनके द्वारा 9 अलग अलग शैक्षिणक संस्थानों में कुल 12 बार डायरेक्टर के पद हेतु आवेदन किया लेकिन यह एमआईटीएस का दुर्भाग्य ही था कि उनके आवेदन उनकी दोयम दर्जे की शैक्षणिक योग्यता के चलते शॉर्टलिस्टेड ही नहीं हो पाते थे, लगातार 12 बार अयोग्य घोषित होने के बाद एमआईटीएस में चयन समिति को किसी तरह गुमराह कर संस्थान का डायरेक्टर बनने में सफल हो ही गए साथ साथ धर्मपत्नी को भी डीन अकादमिक बना लिया जबकि वह भी इस पद के लिए एलिजिबल नहीं थी लेकिन नियम और कायदे तो जैसे सामान्य शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए है बाकी स्वयं कुलगुरु और उनकी पत्नी व उनके कुछ चंद सिपहसलारों के लिए कोई नियम कायदा लागू नहीं किया जाता।
वर्ष 2024 यह संस्थान उच्च शिक्षा विभाग भारत सरकार द्वारा डीम्ड विश्विद्यालय घोषित किया गया लेकिन फिर वही ढपली वही राग पंडित साहब ने जैसे उच्च प्रबंधन की कमजोर नस पकड़ रखी हो प्रबंधन ने यूजीसी के नियमों की अवहेलना करते हुए कुलगुरु की चयन प्रक्रिया ही आरंभ नहीं की। फिर बैखौफ होकर साहब ने अपनी धर्मपत्नी को भी नियम विरुद्ध डीन फेकल्टी एंड इंजीनियरिंग बना दिया।

फिर धर्म पत्नी को प्रो वीसी सम कुलगुरु बना दिया और लगभग 38 लाख की लक्जरी कार संस्थान के खर्चे से प्रबंधन को गुमराह कर पत्नी के लिए खरीद डाली, वह भी तब जब इस लक्जरी कार की भी पात्रता उनकी पत्नी को अथवा अन्य किसी भी अधिकारी को नहीं है।
संस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि दोनों पति पत्नी का जलवा “महाराज” “महारानी” से कम नहीं है, राजपरिवार से इतर इन्होंने MITS को अपना साम्राज्य स्व घोषित कर लिया है और अक्सर रंगीन शामों को होने वाली मीटिंग में साहब इतराते हैं कि मेरे पास चेयरमैन का हिसाब लिखा है कोई मेरा कुछ नहीं बिगड़ सकता।

साहब और मेडम को दो अलग अलग लग्जरी कारों के लिए चार ड्राइवर लगते हैं और कार से मैडम तभी पाँव नीचे तभी रखती है जब एक कर्मचारी कार का दरवाजा खोले और दूसरा उनका बैग उठाए, है न महाराज और महारानी वाला रुतबा।
ठहरिए, इतना ही नहीं साहब के बंगले पर एक नहीं दो नहीं तीन नहीं चार नहीं 14 एसी लगाए गए है और यह एसी भी कोई साधारण नहीं बल्कि विशेष एयर कंडीशनर हैं। जिनमें दो तो बाहर गार्डन में बैठने के लिए टावर एसी हैं। यही नहीं बंगले की छत पर आर ओ मशीन भी पानी की टंकियों से कनेक्टेड है। नहाने और धोने का पानी के लिए भी आर ओ का पानी इस्तेमाल किया जाता है। है न संस्थान के शासकीय धन का दुरपयोग। पहले निदेशक और अब कुलगुरु रहते हुए कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप प्रमाण सहित संस्था प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया तक पहुंचाए जा चुके है लेकिन अब तक प्रबंधन द्वारा इनपर कोई कार्रवाई देखने को मिल सकी है जिससे साहब के शाम की बैठकों में कहें गए कथनों को लेकर तरह तरह की चर्चाएं होने लगी हैं।

चम्बल ब्रेकिंग द्वारा संस्था में शिक्षकों और कर्मचारियों से बात की तो पता चला कि आरके पण्डित और उनकी पत्नी मंजरी पण्डित स्वयं को MITS का महाराज महारानी मानकर ही व्यवहार करते हैं।
वहीं छात्र अभिजीत सोनी, हर्षिता शर्मा, कपिल श्रीवास्तव, अंश शर्मा, रोहित तोमर, राम गुर्जर ने बताया कि शायद यह भारत का इकलौता विश्विद्यालय है जहा पति कुलगुरू और पत्नी सम कुलगुरु हैं। चूंकि छात्र जब भी इनकी पत्नी सम कुलगुरु से मिलने जाते हैं तो छात्रों को स्टाफ के माध्यम से मिलने से मना करवा दिया जाता है इस स्थिति की शिकायत छात्र अगर करें तो आखिर किससे करें क्योंकि सम कुलगुरु को ऊपर तो कुलगुरू होता है जो कि मेडम के हसबैंड हैं जब हसबैंड ही कुलगुरु हैं तो छात्र आखिर किससे कहें।

छात्रों ने बताया कि दो दो प्लेसमेंट अधिकारी होते हुए भी प्लेसमेंट कंपनियां यहां क्यों नहीं आ रही समझ में नहीं आता। चेयरमैन सिंधिया को चाहिए कि वह किसी योग्य व्यक्ति के हाथ में संस्था की कमान दें ताकि यहां पढ़ने आने वाले छात्रों को पर्याप्त प्लेसमेंट के बेहतर अवसर मिले और उनका भविष्य सुनहरा हो।

नाम प्रकाशन न करने की शर्त पर शिक्षकों ने बताया कि सीनियर प्रोफेसर हों या असिस्टेंट प्रोफेसर आए दिन प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है सर्वप्रथम तो जबरन मूल विभागों से हटाकर अन्यत्र विभागों में नियम विरुद्ध पदस्थ कर दिया जाता है उसके बाद टीचिंग के अतिरिक्त नॉन टीचिंग का वर्क लोड जबरन थोप रखा है हम लोग बच्चों को पढ़ाएं या नॉन टीचिंग स्टाफ के काम करें।

कर्मचारियों का कहना है कि यहां कर्मचारियों की तो बेहद बुरी हालत है, कर्मचारियों की भर्ती दशकभर से नहीं हुई जिसके चलते नियमित स्टाफ तो बचा ही नहीं है। यही नहीं मिलने वाले प्रत्येक लाभ के लिए कई कई साल इंतजार करना पड़ता है शासन से पैसा आ भी जाये तो कुलगुरु उस पैसे को कर्मचारियों से छुपाकर उसका उपयोग अन्यत्र कार्य में करते रहते है जब तक कि कोई कर्मचारी के पास शासन से राशि आवंटन का पत्र हाथ न आ जाए तब तक इनके द्वारा टालमटोल किया जाता है। इनके द्वारा दो एक चुनिंदा कुछ कर्मचारियों को छोड़ दे तो किसी भी कर्मचारी को प्रमोशन नहीं दिया गया जबकि 30 वर्ष की सेवा में न्यूनतम 2 क्रमोन्नति एवं 1 प्रमोशन का नियम है परंतु यहां इनके द्वारा क्रमोन्नति के लिए भी तड़पा लिया जाता है।

एडवोकेट अवधेश सिंह तोमर ने तमाम अनियमितताओं से संबंधित प्रमाण सहित शिकायत श्री सिंधिया सहित लोकायुक्त से लेकर केंद्रीय जांच एजेंसियों एवं प्रधानमंत्री कार्यालय तक में कर दी है लोकायुक्त एवं केंद्रीय उच्च शिक्षा मंत्रालय ने भी पूरे मामले को संज्ञान में ले लिया है हालांकि जहां आरके पण्डित द्वारा जांच को मैनेज करने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं संस्था के चेयरमैन सिंधिया को भी गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। चम्बल ब्रेकिंग से बात करते हुए एडवोकेट तोमर ने बताया कि हां उनको भी अप्रोच कर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन उनके द्वारा अप्रोच करने वाले उच्च प्रबंधन से जुड़े व्यक्ति से स्पष्ट कह दिया गया है कि यदि इन पर कार्रवाई नहीं की गई तो जल्द ही वह इस मामले को न्यायालय में लेकर जाएंगे।

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