डबरा खाकी पर दाग: पुलिस की बर्बरता से मौत के 20 दिन बाद भी आरोपी पुलिसकर्मी आज़ाद, परिजनों ने जताया आक्रोश

ग्वालियर/डबरा: मध्यप्रदेश के डबरा में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिसकर्मियों की पिटाई से गंभीर रूप से घायल हुए नगर पालिका कर्मचारी रमेश वाल्मीकि की मौत के 20 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। परिजनों का आरोप है कि महकमा अपने ही कर्मचारियों को बचाने की कोशिश में जुटा है और मामले को ठंडे बस्ते में डालने की साजिश रची जा रही है।
घटना के 20 दिन बाद भी नहीं हुई एफआईआर, परिजनों में भारी रोष
मामला सिमरिया टेकरी के पास का है, जहाँ दतिया जिले के गोराघाट थाने में तैनात दो पुलिसकर्मियों जितेंद्र गुर्जर, राजकुमार पालिया ने रमेश वाल्मीकि के साथ कथित तौर पर बेरहमी से मारपीट की थी। इलाज के दौरान रमेश की जान चली गई। घटना के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने परिजनों को निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। हालांकि, 20 दिन बीत जाने के बाद भी न तो आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की गई है और न ही कोई विभागीय निलंबन हुआ है, जिससे परिजनों का गुस्सा चरम पर है।
घर के इकलौते कमाऊ सदस्य की मौत से रोजी-रोटी का संकट
डबरा नगर पालिका में कार्यरत रमेश वाल्मीकि ही अपने घर के एकमात्र सहारा थे। उनकी असामयिक और दर्दनाक मौत के बाद से परिवार के सामने जीवन-यापन का भारी संकट खड़ा हो गया है। परिजनों का साफ कहना है कि रमेश की मौत पुलिसकर्मियों की बर्बरता का सीधा नतीजा है। एक तरफ जहां परिवार अपनों को खोने के गम में डूबा है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें इंसाफ पाने के लिए भी सरकारी तंत्र से संघर्ष करना पड़ रहा है।
परिजनों ने दी आंदोलन की चेतावनी, नौकरी और एफआईआर की मांग
स्थानीय मीडिया से बात करते हुए मृतक के परिवार ने पुलिस प्रशासन पर सीधे तौर पर मामले को रफा-दफा करने का आरोप लगाया है। परिजनों ने मांग की है कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल हत्या का मुकदमा (FIR) दर्ज किया जाए और परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाए। पीड़ित परिवार ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही न्याय नहीं मिला, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।



