ग्वालियर के KRG कॉलेज की ऐतिहासिक बावड़ी का जीर्णोद्धार, सावित्री श्रीवास्तव की पहल से मिला नया जीवन

ग्वालियर। शहर में पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और जल संवर्धन को बढ़ावा देने की दिशा में शासकीय कमलाराजा कन्या स्वशासी महाविद्यालय (KRG कॉलेज) में महत्वपूर्ण पहल की गई है। महाविद्यालय परिसर स्थित पुरानी बावड़ी का जीर्णोद्धार पूरा होने के बाद बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को उसका लोकार्पण किया गया। यह कार्य महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई और नगर निगम के संयुक्त प्रयासों से संपन्न हुआ। इस पहल में नगर निगम की ब्रांड एंबेसडर एवं वाटर वुमन सावित्री श्रीवास्तव की अहम भूमिका रही।
सावित्री श्रीवास्तव की पहल से बावड़ी का हुआ कायाकल्प
ग्वालियर में जल संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रहीं सावित्री श्रीवास्तव ने KRG कॉलेज की पुरानी बावड़ी को संरक्षित करने की दिशा में पहल की। जीर्णोद्धार का उद्देश्य पारंपरिक जल स्रोतों को सुरक्षित रखना और नई पीढ़ी को उनके महत्व से परिचित कराना है।
बावड़ी के संरक्षण से परिसर में मौजूद इस पारंपरिक जल संरचना को नया स्वरूप मिला है। सावित्री श्रीवास्तव का मानना है कि पुराने जल स्रोतों को सहेजना भविष्य के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में जरूरी कदम है।
सुरक्षा के लिए बावड़ी के चारों ओर लगाई गई लोहे की रेलिंग
बावड़ी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए KRG कॉलेज की प्राचार्य साधना मैम के प्रयासों से इसके चारों ओर लोहे की सुरक्षा रेलिंग लगवाई गई है। इसका उद्देश्य बावड़ी को नुकसान से बचाना और परिसर में आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सावित्री श्रीवास्तव के अनुसार, बावड़ी का पानी बेहद मीठा है। ऐसे पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण न केवल ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इनके जल की गुणवत्ता और उपयोगिता को बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।
पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य
सावित्री श्रीवास्तव का लक्ष्य ग्वालियर में मौजूद पुराने जल स्रोतों की पहचान कर उनका संरक्षण और पुनर्जीवन करना है। उनका जोर जल संचयन, वर्षा जल को सहेजने और आम लोगों को पानी की महत्ता के प्रति जागरूक करने पर है।
विशेषज्ञों के अनुसार, उचित तकनीकी देखरेख के साथ पारंपरिक जल संरचनाओं का संरक्षण वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण में सहायक हो सकता है। KRG कॉलेज की बावड़ी का जीर्णोद्धार भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
इस पहल से उम्मीद है कि शहर के अन्य संस्थान और नागरिक भी अपने आसपास मौजूद पुराने कुओं, बावड़ियों और दूसरे पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के लिए आगे आएंगे। जल स्रोतों को सुरक्षित रखना और पानी की हर बूंद का महत्व समझना ही जल संरक्षण के प्रयासों को सफल बना सकता है।



