KRH में महा-लापरवाही: ₹3.28 करोड़ मंजूर होने पर भी PWD की कछुआ चाल; 8 घंटे रहा ब्लैकआउट, उमस से तड़पे मासूम और गर्भवती महिलाएं

ग्वालियर। ग्वालियर के प्रमुख कमलाराजा अस्पताल (KRH) से लोक निर्माण विभाग (PWD) और चिकित्सा शिक्षा विभाग की एक बेहद शर्मनाक लापरवाही सामने आई है। अस्पताल की चरमराती विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार की ओर से 3 करोड़ 28 लाख 56 हजार रुपये का भारी-भरकम बजट स्वीकृत होने के बावजूद पीडब्ल्यूडी की कछुआ चाल के कारण अधिकांश काम फाइलों में दबे हुए हैं। इस प्रशासनिक शिथिलता का खामियाजा अस्पताल में भर्ती बेकसूर प्रसूताओं, नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है, जिनकी जान दांव पर लगी हुई है।
केबल फाल्ट से 8 घंटे तक छाया रहा अंधेरा, टालने पड़े 5 जरूरी ऑपरेशन
विभागीय लापरवाही की जीती-जागती और खौफनाक बानगी शुक्रवार को देखने को मिली, जब अस्पताल की मुख्य बिजली केबल में अचानक एक तकनीकी फाल्ट आ गया। इस खराबी के कारण अस्पताल में करीब 8 घंटे तक पूरी तरह से ‘ब्लैकआउट’ (बिजली गुल) रहा। उमस और भीषण गर्मी के बीच पोस्ट ऑपरेटिव वार्डों में भर्ती प्रसूताएं और आईसीयू में भर्ती नवजात शिशु तड़पने को मजबूर हो गए। बिजली न होने के कारण अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं और डॉक्टरों को तत्काल होने वाले 5 महत्वपूर्ण ऑपरेशनों को मजबूरन स्थगित करना पड़ा, जिससे मरीजों की जान पर बन आई।
करोड़ों का बजट मिलने के बाद भी अटके हैं फायर सेफ्टी और ट्रांसफार्मर के काम
लोक निर्माण विभाग (विद्युत विंग) के कार्यपालन यंत्री द्वारा तैयार एस्टीमेट और तकनीकी स्वीकृति के आधार पर KRH के लिए यह बड़ी राशि जारी की गई थी। इस बजट के तहत अस्पताल में तीन सबसे प्रमुख कार्य होने थे:
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लेबर ऑब्सटेट्रिक आईसीयू का बिजली कार्य (यह एकमात्र कार्य है जो पूरा हो सका है)।
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फायर सेफ्टी और संपूर्ण विद्युत सुरक्षा ऑडिट (काम अभी तक अधर में लटका है)।
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नया पावर ट्रांसफार्मर और आधुनिक इलेक्ट्रिकल पैनल इंस्टालेशन (इस बेहद जरूरी काम की शुरुआत तक नहीं हो सकी है)।
GRMC प्रबंधन की चुप्पी पर उठे सवाल, PWD को दी गई चेतावनियां बेअसर
इस पूरे मामले में अस्पताल की लचर व्यवस्था के साथ-साथ गजराराजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) प्रबंधन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि बार-बार आ रही दिक्कतों और PWD की लेती-देती कार्यप्रणाली को लेकर अस्पताल प्रबंधन द्वारा दी गईं कई प्रशासनिक चेतावनियां पूरी तरह बेअसर साबित हुई हैं। इसके बावजूद जीआरएमसी प्रबंधन इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठा है। यदि समय रहते मुख्य ट्रांसफार्मर और पैनल बदलने का काम शुरू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में शॉर्ट सर्किट से किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।



