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‘BJP में हूं और BJP में ही मरूंगा’: दतिया टिकट कटने और समर्थकों के बवाल पर पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का दिल्ली से बड़ा बयान

नई दिल्ली/दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए टिकट वितरण के बाद उपजे भारी असंतोष और कयासों के बाजार पर आखिरकार भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने खुद पूर्णविराम लगा दिया है। दतिया में भड़के तीखे अंदरूनी कलह और उनके दल-बदल की अफवाहों के बीच नरोत्तम मिश्रा ने दिल्ली में दो टूक कहा, “मैं बीजेपी में हूं और बीजेपी में ही मरूंगा। मेरे कहीं भी जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।” इस बयान के बाद कांग्रेस की उन उम्मीदों पर पानी फिर गया है, जो भाजपा की इस गुटबाजी का सियासी फायदा उठाने की फिराक में थी।

‘पार्टी सबसे बड़ी है, कार्यकर्ताओं का आवेश क्षणिक था’— दिल्ली में बोले नरोत्तम

दतिया में हुए भारी हंगामे के बाद अचानक दिल्ली पहुंचे नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा के राष्ट्रीय संगठन पदाधिकारियों और चुनाव सह-प्रभारी नितिन नबीन से मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने संगठन के प्रति अपनी अटूट निष्ठा जताई। नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “दतिया में टिकट घोषित होने के बाद कार्यकर्ताओं में जो गुस्सा था, वह एक क्षणिक आवेश था, जो अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। मैं यहाँ दिल्ली में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से सांगठनिक चर्चा के लिए आया था। किसी भी व्यक्ति से बड़ी पार्टी होती है, पार्टी ही सबसे ऊपर है और हमेशा सर्वोपरि रहेगी।”

आशुतोष तिवारी को टिकट मिलने पर समर्थकों ने किया था अभूतपूर्व पथराव और हंगामा

गौरतलब है कि दतिया उपचुनाव के लिए नरोत्तम मिश्रा को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा था और उन्होंने क्षेत्र में अपनी पूरी तैयारी भी कर ली थी। लेकिन केंद्रीय चुनाव समिति ने अचानक चौकाते हुए आशुतोष तिवारी को भाजपा का आधिकारिक प्रत्याशी घोषित कर दिया। टिकट कटने से नाराज नरोत्तम मिश्रा के सैकड़ों समर्थकों ने दतिया की सड़कों पर उतरकर अभूतपूर्व बवाल काटा था। समर्थकों ने न केवल चक्काजाम और पथराव किया, बल्कि दतिया स्थित भाजपा कार्यालय पर भी एक तरह से कब्जा कर लिया था और लगातार उम्मीदवार बदलने का दबाव बना रहे थे।

सीएम मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल से ‘सीक्रेट मीटिंग’ के बाद बदले सुर

शुरुआत में समर्थकों के हंगामे पर अनभिज्ञता जताने वाले नरोत्तम मिश्रा की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ सिलसिलेवार गुपचुप बैठकें हुईं। इन उच्चस्तरीय बैठकों के बाद पूर्व मंत्री के सुर पूरी तरह बदल गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब उनका एकमात्र मकसद दतिया उपचुनाव में भाजपा को जीत दिलाना है। उन्होंने ऐलान किया कि वे खुद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के नामांकन दाखिले के दौरान प्रस्तावक और सहयोगी के रूप में मौजूद रहेंगे।

दतिया में दिलचस्प हुआ मुकाबला, कांग्रेस के घनश्याम सिंह से होगी सीधी टक्कर

नरोत्तम मिश्रा के इस डैमेज कंट्रोल वाले बयान के बाद दतिया का सियासी रण बेहद दिलचस्प हो गया है। विपक्ष की बात करें तो कांग्रेस ने यहाँ से घनश्याम सिंह को अपना उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है। कांग्रेस को उम्मीद थी कि भाजपा की यह अंदरूनी खींचतान उसके लिए जीत की राह आसान करेगी, लेकिन नरोत्तम मिश्रा द्वारा बगावत से साफ इनकार करने और आशुतोष तिवारी के समर्थन में उतरने के फैसले ने भाजपा को फिर से फ्रंट फुट पर ला खड़ा किया है।

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