MITS अधिकारी कर्मचारियों ने केंद्रीयमंत्री सिंधिया एवं महामहिम राज्यपाल महोदय से की कुलगुरु द्वारा की गई अनियमितताओं की शिकायत…

ग्वालियर। कुलगुरु आरके पंडित लगातार विवादों में फंसते जा रहे हैं जिसके चलते एमआईटीएस की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है परंतु उच्च प्रबंधन कहीं न कहीं कुंभकर्णी नींद में सोता नजर आ रहा है। चम्बल ब्रैकिंग को अधिकारी कर्मचारियों की ओर से लिखित शिकायती पत्र की प्रति प्राप्त हुई है जिसे कि संस्था के चेयरमैन केंद्रीय मंत्री श्रीमंत सिंधिया सहित राज्यपाल महोदय के नाम लिखा गया है। इस पत्र में एमआईटीएस कुलगुरु आरके पंडित के द्वारा मार्च 2015 से लेकर 2026 तक के लगभग 12 साल के लम्बे कार्यकाल के दौरान किए गए आर्थिक घोटालों के आरोप लगाये गए हैं।
इससे पूर्व एमपी हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट अवधेश सिंह तोमर ने भी आरके पंडित की मार्च 2015 में डायरेक्टर पद पर ही की गई नियुक्ति को अवैध बताते उनपर कई गंभीर अनियमितताओं के संगीन आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर राज्यपाल और केंद्रीय एवं प्रादेशिक जांच एजेंसियों को शिकायत की थी प्राप्त जानकारी एवं उपलब्ध दस्तावेज अनुसार अलग अलग जांच एजेंसियों ने आरके पंडित द्वारा की गई अनियमितताओं की सघन जांच आरंभ कर दी है।
अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा चेयरमैन ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं महामहिम राज्यपाल को की गई शिकायत के अंश
इस पत्र के माध्यम से माधव प्रोद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान ग्वालियर के निदेशक डॉ आर के पंडित द्वारा की जा रही आर्थिक अनियमितता एवं किये जा रहे गबन के बारे मे अवगत कराना चाहते है-
1. संचालक दवारा सार्वजानिक रूप से कहा जाता है कि कोई भी जाँच एजेंसी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती है, क्योंकि मैं सबको ऊपर तक फंड देता हूँ।
2. पूर्व संचालक एवं कथित कुलगुरू आर्किटेक्टर के प्रोफेसर रहे है, और मास्टर डिग्री सिविल में की है उन्हें बखूबी पता है की सिविल वर्क में कितना कमीशन मिलता है इसलिए बार बार संस्थान की बिल्डिंगों को तोड़कर, कमरों को तोड़कर रेनोवेट किया जाता है और अपने खास ठेकेदार (संस्थान का भूतपूर्व छात्र) से ही काम कराया जाता है जिसमे प्रमुख रूप से हॉस्टल (नंबर 7) 10 करोड़, नई अकादमिक बिल्डिंग लगभग 12 करोड़, क्रिकेट ग्राउंड 3 करोड़, सभी क्लास रूम (12) को पुनः तोड़कर (प्रतयेक 65 लाख) के बनाये गए है जिसमे कंप्यूटर रूम प्रमुख है जिसे इनके कार्यकाल मे ही दो बार बनाया गया जिसका खर्च 7 करोड़ के आसपास है।
3. आरके पंडित के कार्यकाल मे संस्थान को भारत सरकार दवारा TEQIP-II एवं TEQIP-III ग्रांट क्रमशः 10 व 15 करोड़ मिली थी जिसका इन्होने प्रोफ प्रभाकर शर्मा (ओएसडी) एवं धर्मेंद्र गोरखपुरी (वित्त अधिकारी) के साथ मिलकर जमकर खरीददारी की है। उल्लेखनीय है कि यह संस्था भारत में अकेली है जिसने वर्ल्ड बैंक की उपरोक्त ग्रांट का पूर्ण उपयोग किया है।
4. संचालक को प्रति सेमेस्टर परीक्षा शाखा से 2.0 लाख रूपये, नोडल सेंटर से 1 लाख रूपये तथा सिविल व् इलेक्ट्रिकल कंसल्टेंसी से 2 लाख का भुगतान किया जाता है, जबकि शिक्षकों को प्रायोगिक परीक्षा का भुगतान नहीं दिया जाता है। संस्थान के लोकल ऑडिट अधिकारी को भी इन्होने अपने साथ मिला रखा है जो किसी भी फाइल को बिना देखे ही गाड़ी मे बैठे बैठे सिग्नेचर कर देते है।
5. हॉस्टल नंबर 1, 2 एवं 3 जो की पूर्व मे SC / ST निधि से बनाया गया था उसे संचालक आरके पंडित द्वारा अपनी किसी खास निजी कंपनी से मुआयना कराकर नहीं रहने योग्य घोषित करा लिया और स्टूडेंट्स को विगत पांच वर्षो से रहने नहीं दिया जा रहा है। जबकि आज भी वो सभी हॉस्टल थोड़े रेनोवेशन से ही आगामी 40-50 वर्ष चलाये जा सकते है परन्तु देखरेख की आभाव मे हॉस्टल जर्जर होते जा रहे है जो की संचालक महोदय चाह रहे है इस प्रकरण में लोकायुक्त केस चल रहा है।
6. संचालक को कॉलेज मे जो बंगलो मिला है उसकी साख सुविधाओं मे लगभग एक करोड़ रूपये खर्च किये है जिसमे 12 एयर कंडीशनर, एक स्विमिंग पूल एवं नहाने के लिए 25 लाख रूपये की आरओ मशीन छत पर लगाई गई है बाहर गार्डन मे बैठने के लिए 2 आउटडोर एयर कंडीशनर ख़रीदे गए है उल्लेखनीए है की उन्होने पड़ोस के वार्डन क्वार्टर को खाली कराकर अपने उपयोग मे लिया गया है।
7. संचालक दवारा प्रति माह सिक्योरिटी एजेंसी से 25000 रूपये रिश्वत प्रोफेसर प्रभाकर शर्मा के माध्यम से ली जाती है. सभी गॉर्ड से इसकी पुष्टि की जा सकती है।
8. संचालक ने अपने 7 वर्ष के कार्यकाल मे लगभग 30 करोड़ रूपये Kotak Mahindra Bank, Mumbai A/c No. 09580020004243 एवं Bank of Baroda, Mumbai A/c No. 03830100001725 मे ट्रांसफर कर दिए है जिसकी गहनता से जाँच की जानी चाहिए। संचालक ने अपने लाभ के लिए संस्थान का अकाउंट यूनियन बैंक से हटाकर HDFC बैंक ग्वालियर की लोहा मंडी शाखा में करा लिया है जिसके बदले में उन्होंने हवाला के माध्यम से पैसा अपनी दोनों बेटियों के लिए बैंगलोर एवं नोयडा में घर खरीदवाया है।
9. संस्थान के लेखा शाखा में 25-27 अकाउंट है जिसमे प्रमुख रूप से परीक्षा शाखा का अकाउंट है करोडो रूपये है जिसका कभी ऑडिट नहीं होता है उसी अकाउंट का दुरुपयोग करके लाखो रूपये अपने शौक एवं घूमे फिरने में कर रहे है।
10. डॉ आर के पंडित (संचालक) दवारा AICTE नियमो के विरुद्ध (आदेश दिनाक 08/04/2011) पीएचडी के इंक्रीमेंट (1999-2011) की धनराशि रूपये 200159/- अवैध रूप से ले ली है तथा पूर्व संचालक एवं बोर्ड मेंबर्स द्वारा मेमो मिलने पर भी आज दिनांक तक पीएचडी का अवैध रूप से लिया इन्क्रीमेंट वापस संस्थान मे जमा नहीं कराया है।
11. संचालक ने जुलाई 2016 से स्वयं हायर ग्रेड पे (HAG) का इन्क्रीमेंट लिया है तथा एरियर भी षड्यंत्र कर गुपचुप तरीके से लिया गया है जबकि सभी प्रमोशन आर्डर मैं उनके दवारा यह आदेश दिए गए है कि किसी को एरियर का भुगतान नहीं किया जायेगा। जबकि वो इस पद की योग्यता भी नहीं रखते है।
12. संचालक दवारा अपने सभी एरियर का भुगतान करा लिया है जबकि टीचर्स और स्टाफ को इनके दवारा यह 2. कहा जाता है की बोर्ड ने एरियर देने से मना कर दिया है संचालक को आज भी पीएफ अकाउंट में पैसा जमा कराया जा रहा है जबकि वे 62 की उम्र मे रिटायर हो चुके है।
13. निदेशक ने अपने 7 वर्ष के कार्यकाल में 03 बार शिक्षकों की भर्ती निकाली और जमकर पैसा कमाया गया है। 13. जिसमे प्रमुख रूप से वरुण शर्मा, अंकित तिवारी, निखिल पालीवाल, शुभी कंसल, त्रिलोक प्रताप सिंह, मोनिका भदौरिया, सौरभ रघुवंशी, विकास माहोर, राहुल दुबे, सोमिल माहेश्वरी, अभिषेक दीक्षित, विवेक शर्मा है ये सभी के या तो रिश्तेदार कॉलेज मे है या इनसे 15 से 20 लाख लिए गए है।
14. ग्वालियर शहर से प्रकाशित होने वाले दैनिक भास्कर एवं नईदुनिया अखबार में काम करने वाले पत्रकारों की * पत्नियों को नियुक्ति दी गई है जिससे संस्थान की कोई भी बात अखबार में नहीं छप सके।’
15. संचालक ने संस्थान की कोई गलत बात अखबार (प्रमुख रूप से दैनिक भास्कर) में नहीं छप पाए इसके लिए एक तृतीय वर्ग कर्मचारी को जनसम्पर्क अधिकारी बनाया है जबकि वो इस पद की योग्यता भी नहीं रखता है। इस कार्य हेतु अलग से प्रतिमाह 5000 रूपये पारिश्रमिक भी दिया जाता है उल्लेखनीय है की कर्मचारी 2016 के बाद से कभी कभी ही कॉलेज आता है। कर्मचारी अजाक्स का अध्यक्ष है यहाँ तक की संचालक एवं कलेक्टर महोदय भी उसके द्वारा किये जा रहे कार्यक्रम में शामिल हो जाते है।
16. संचालक दवारा अपने खास वेंडर को ही हॉस्टल की देखरेख का आदेश दिया जाता है, और इसके बदले में • उनसे प्रतिमाह 20 हजार रूपये रिश्वत ली जा रही है इस समय वर्तमान में संस्थान में चार हॉस्टल चल रहे है। 17. संचालक दवारा तकनीकी शिक्षा संचालनालय मध्यप्रदेश पत्र क्रमांक / एस-1 /पी /2023/865, भोपाल दिनांक 23/11/2023 के विषय में अनुदान के संबद्ध में निदेशक डॉ आर के पंडित दवारा दी गई जानकारी कूटरचित एवं झूठी है, निदेशक स्वयं 62 वर्ष की उम्र मे रिटायर हो चुके है जबकि उन्होंने अपनी रिटायरमेंट उम्र 2030 दर्शाई है और साथ मैं उनकी पत्नी डॉ मंजरी पंडित 2025 मे पद से रिटायर होंगी जबकि उनकी रिटायरमेंट उम्र 2028 दिखाई गई है ऐसा ही षड़यंत्र कर शासन से अनुदान माँगा जा रहा है इसकी जाँच की जानी चाहिए।
18. संचालक ने जिस ठेकेदार से संस्थान का काम कराया जा रहा है उसके माध्यम से डीबी सिटी गवालियर मे एक डुप्लेक्स, बैंगलोर में फ्लैट एवं गाजियाबाद में एक आलिशान बंगलो ख़रीदा गया है इनकी प्रॉपर्टी की जांच कराये जाने की तुरंत आवश्यकता है।
19. संचालक ने सभी कर्मचारी के रिटायरमेंट दिवस मे अपने आप को भगवान् कहा है और सार्वजानिक तोर पर यह कहते है की में है यहाँ का मालिक हूँ मुझे तो अब श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया भी नहीं हटा सकते है।
20. नियमानुसार किसी संचालक को अधिकतम पांच वर्ष के लिए ही संस्थान का संचालक बनाया जाता है लेकिन डॉ पंडित को 2016 से ही इस पद पर बना रखा है साथ ही उनकी पत्नी भी वर्ष 2016 से ही डीन अकादमिक बनी हुई है जबकि और भी प्रोफेसर समान योग्यता रखते है लेकिन उन्हें नहीं बनाया जा रहा है। डॉ मंजरी पंडित दवारा संसथान के वाहन का भी खूब दुरपयोग किया जा रहा है।
21. संचालक दवारा महिला कर्मचरियो के साथ भी अभद्रता की जाती है लेकिन डर की वजह से कोई कुछ बात नहीं बता पता है साथ ही जिस रास्ते से वो संस्थान आते है उस रास्ते पर किसी अन्य शिक्षक एवं छात्र को गाड़ी लाना मना कर रखा है यहाँ तक की जिस वाशरूम को उनकी पत्नी इस्तेमाल करती है उसके सामने ही एक महिला गॉर्ड की 10 घंटे की ड्यूटी लगा रखी है यह बहुत ही शर्मनाक है।
सलग्न: – आर्थिक अनियमिता के प्रमाण
समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी गण
माधव प्रोधोगिकी एवं विज्ञान संस्थान ग्वालियर

नोट: यह समाचार एमआईटीएस अधिकारी कर्मचारियों की ओर से चम्बल ब्रेकिंग को प्रेषित शिकायत पत्र पर केंद्रित हैं। इस समाचार में चम्बल ब्रेकिंग स्वयं अपनी तरफ से किसी भी प्रकार से उक्त आरोपों की पुष्टि नहीं करता।



