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MITS प्रकरण में नया मोड़: कुलगुरु के शैक्षणिक रिकॉर्ड के चलते चयन समिति पर भी लगा प्रश्नचिन्ह

ग्वालियर। माधव इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (MITS) से जुड़े विवादों में एक नया मोड़ सामने आया है। संस्थान के कुलगुरु प्रो. आर.के. पंडित के शैक्षणिक रिकॉर्ड को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायकर्ता का दावा है कि देश-विदेश में अपनी उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपरा और उच्च गुणवत्ता वाले इंजीनियर तैयार करने के लिए प्रसिद्ध MITS में शीर्ष पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर कई विसंगतियां जानबूझकर की गई हैं।
स्वयं कुलगुरु प्रो. पंडित के शैक्षणिक रिकॉर्ड में कक्षा 10वीं में 44 प्रतिशत अंक, 12वीं में 60 प्रतिशत अंक तथा बी.आर्क. में द्वितीय श्रेणी का परिणाम दर्ज है। इसके अलावा उनका मास्टर्स और पीएचडी सिविल इंजीनियरिंग के कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट विषय में है। शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसे शैक्षणिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति का पहले निदेशक और बाद में कुलगुरु पद तक पहुंचना उनके चयन प्रक्रिया पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।


शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि MITS को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद निर्धारितछः महीने की समयावधि में नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से कुलगुरु की नियुक्ति नहीं की गई। वर्तमान कुलगुरु बिना किसी चयन प्रक्रिया में भाग लिए ही पद पर बने हुए हैं, जो यूजीसी नियमों के विपरीत है।


संस्थान के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। आरोप है कि प्रशासनिक बैठकों में अधीनस्थ शिक्षकों एवं कर्मचारियों को कुलगुरु और सम कुलगुरु द्वारा नीचा दिखाया जाता रहा है।

वहीं शैक्षणिक रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच विभिन्न चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
इधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान प्रबंधन द्वारा बोर्ड सदस्य के.के. अग्रवाल की अध्यक्षता में जांच समिति गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि यह समिति निष्पक्ष जांच के बजाय संबंधित अधिकारियों को क्लीन चिट देने का प्रयास कर सकती है। उन्होंने समिति की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं।
संस्थान प्रबंधन अथवा कुलगुरु की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस संबंध में चम्बल ब्रेकिंग द्वारा कुलगुरु आरके पण्डित से संपर्क कर उनका पक्ष का प्रकाशन करने के लिए प्रतिक्रिया चाही गई तो उन्होंने कहा कि मैं इस मामले में कोई कमेंट नहीं करूंगा मेनेजमेंट देख रहा है। यह कहकर फोन काट दिया। वही संबंध में संस्था के सचिव से चम्बल ब्रेकिंग ने संपर्क किया तो विगत दो – तीन दिनों से उन्होंने फोन तक रिसीव नहीं किया।

इस सम्बन्ध में भी शिकायकर्ता अवधेश तोमर ने कहा कि सबूत जब सभी खिलाफ हों, तो कमेंट कर भी क्या सकते हैं।

संस्थान से जुड़े लोगों के अनुसार के के अग्रवाल की अध्यक्षता में जांच समिति की निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना बेईमानी है क्योंकि श्री आरके पण्डित और के के अग्रवाल की निकटता जग जाहिर है ऐसे में के के अग्रवाल की समिति हर संभव प्रयास यही करेगी कि किसी तरह क्लीनचिट दे दी जाए।

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