रेट लिस्ट गायब, शराब की दुकानों पर मनमानी का खेल?

चम्बल ब्रेकिंग की पड़ताल में दुकानों पर निर्धारित कीमतों की सूची नहीं मिली, ओवररेटिंग की शिकायतों ने खड़े किए गंभीर सवाल…
ग्वालियर। शराब दुकानों पर ग्राहक को शराब की निर्धारित कीमत पता चले, इसके लिए रेट लिस्ट का स्पष्ट प्रदर्शन बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन शहर में चम्बल ब्रेकिंग की टीम की पड़ताल में कई शराब दुकानों पर रेट लिस्ट सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं मिली। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब ग्राहक के सामने निर्धारित कीमत ही स्पष्ट नहीं होगी तो शराब की बिक्री किस रेट पर हो रही है, इसकी निगरानी कैसे होगी?
रेट लिस्ट नहीं तो ग्राहक कैसे पहचाने ओवररेटिंग?
दुकान पर निर्धारित कीमत प्रदर्शित नहीं होने से ग्राहक के सामने शराब की वास्तविक कीमत जांचने का तत्काल साधन नहीं रहता। इसी स्थिति में ओवररेटिंग की शिकायतों की गुंजाइश बढ़ने की बात सामने आ रही है। आबकारी विभाग को दुकानों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

आबकारी विभाग की निगरानी पर बड़ा सवाल
यदि शराब दुकानों पर रेट लिस्ट प्रदर्शित करना नियमों के तहत आवश्यक है, तो फिर शहर की दुकानों पर इसका पालन क्यों नहीं दिखाई दे रहा? क्या आबकारी विभाग के निरीक्षण में यह कमी नजर नहीं आई या कार्रवाई के बावजूद व्यवस्था नहीं सुधरी? विभाग की निरीक्षण रिपोर्ट और कार्रवाई सार्वजनिक किए जाने की जरूरत है।
सबहेड-3: ओवररेटिंग से लेकर अवैध शराब तक—जांच की मांग
शहर में अवैध शराब की बिक्री की शिकायतों के बीच शराब दुकानों की बिक्री व्यवस्था और स्टॉक की भी जांच जरूरी है। हालांकि रेट लिस्ट का अभाव अपने आप में अवैध शराब बिक्री का प्रमाण नहीं है, इसलिए दोनों मामलों के बीच संबंध की पुष्टि आबकारी विभाग की जांच के बाद ही हो सकती है। विभाग को दुकानों की बिक्री, स्टॉक और निर्धारित कीमतों का मिलान कर कार्रवाई करनी चाहिए।
बॉक्स आइटम | सवाल सीधे आबकारी विभाग से
❓ कितनी दुकानों पर रेट लिस्ट प्रदर्शित है?
❓ पिछले एक साल में ओवररेटिंग की कितनी शिकायतें मिलीं?
❓ शिकायतों पर कितनी दुकानों के खिलाफ कार्रवाई हुई?
❓ दुकानों का नियमित निरीक्षण कौन और कितनी बार करता है?
❓ अवैध शराब के खिलाफ हाल में कितनी कार्रवाई हुई?
❓ क्या दुकानों के स्टॉक और बिक्री का नियमित मिलान किया जाता है?
बड़ा सवाल
नियमों में अगर रेट स्पष्ट रखने की व्यवस्था है, तो शराब दुकान के काउंटर पर ग्राहक को वह रेट दिखाई क्यों नहीं देता?
चम्बल ब्रेकिंग की पड़ताल जारी है। अब जवाब आबकारी विभाग को देना है।



