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अजमेर जेल में खूनी संघर्ष: कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या, बैरक में साथी कैदी ने तौलिए से घोंटा गला

जयपुर/मुरैना। राजस्थान की सबसे सुरक्षित और हाई-सिक्योरिटी मानी जाने वाली अजमेर जेल के भीतर एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। चंबल के बीहड़ों से लेकर राजस्थान और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में दशकों तक आतंक का पर्याय रहे कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की जेल के अंदर ही बेरहमी से हत्या कर दी गई है। जेल की बैरक में हुए एक आपसी खूनी संघर्ष के दौरान साथी कैदी ने तौलिए से गला घोंटकर जगन को मौत के घाट उतार दिया।

बैरक के भीतर हुआ मर्डर, चेकिंग के दौरान मिला शव

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह वारदात सोमवार दोपहर की है। अजमेर जेल की एक ही बैरक में बंद कैदियों के बीच पिछले कुछ दिनों से किसी बात को लेकर गहरा विवाद चल रहा था। सोमवार दोपहर करीब 3 बजे जब जेल प्रहरी और सुरक्षाकर्मी नियमित जांच (राउंड) के लिए बैरक खोलने पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए। बैरक के भीतर डकैत जगन गुर्जर का शव एक तरफ बेसुध पड़ा हुआ था।

भरतपुर के कुलदीप हत्याकांड के आरोपी ने कबूला जुर्म

जिला पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि जगन गुर्जर की हत्या के आरोप में उसी की बैरक में बंद कैदी विष्णु जाट को नामजद किया गया है। आरोपी विष्णु जाट, भरतपुर के चर्चित कुलदीप हत्याकांड का मुख्य आरोपी है और फिलहाल अजमेर जेल में बंद है। पूछताछ के दौरान आरोपी विष्णु ने जेलकर्मियों और पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उसने तौलिए का फंदा बनाकर जगन का गला घोंटा था।

28 साल का आतंक और वसुंधरा राजे के महल को उड़ाने की धमकी

कुख्यात डकैत जगन गुर्जर का चंबल अंचल और राजस्थान में करीब 28 साल तक एकछत्र आतंक रहा। उस पर हत्या, डकैती, रंगदारी और अपहरण जैसे करीब 123 से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज थे।

  • साल 2008 का चर्चित विवाद: जगन गुर्जर सबसे ज्यादा चर्चाओं में तब आया था, जब साल 2008 में उसने राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के ऐतिहासिक धौलपुर महल को डायनामाइट से उड़ाने की सरेआम धमकी दे डाली थी। इस दुस्साहस के बाद पुलिस ने उस पर शिकंजा कसा था।

इस हाई-प्रोफाइल मर्डर के बाद अजमेर जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस और जेल प्रशासन मामले की गहन तफ्तीश में जुट गए हैं कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच इस वारदात को अंजाम कैसे दिया गया।

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