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ग्वालियर में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई: समय पर काम न करने वाले 1 तहसीलदार और 3 नायब तहसीलदारों पर लगा जुर्माना

ग्वालियर। मध्य प्रदेश में सरकारी कामकाज में लापरवाही बरतने और तय समय-सीमा में जनता की समस्याओं का निराकरण न करने वाले अधिकारियों पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। ‘मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी अधिनियम-2010’ के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्वालियर कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने जिले के चार राजस्व अधिकारियों (एक तहसीलदार और तीन नायब तहसीलदार) पर आर्थिक दंड (जुर्माना) लगाया है।

प्रशासन द्वारा इन अधिकारियों को पहले ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन उनकी तरफ से दिए गए जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए, जिसके बाद अधिनियम के प्रावधानों के तहत यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है।

इन अधिकारियों पर लगा आर्थिक दंड (जुर्माना)

संयुक्त कलेक्टर (लोक सेवा प्रबंधन) द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, द्वितीय अपीलीय अधिकारी की शक्तियों का प्रयोग करते हुए निम्नलिखित राजस्व अधिकारियों पर जुर्माना ठोंका गया है:

  • श्री राघवेन्द्र सिंह कुशवाह (तहसीलदार, बड़ागांव) – ₹5,000 का जुर्माना

  • श्री मुन्ना लाल गौड़ (नायब तहसीलदार, सुपावली) – ₹5,000 का जुर्माना

  • श्री महेश सिंह कुशवाह (नायब तहसीलदार, उटीला) – ₹5,000 का जुर्माना

  • श्री नवल किशोर (नायब तहसीलदार, तानसेन-हस्तिनापुर) – ₹4,000 का जुर्माना

तीन दिनों के भीतर चालान जमा करने के निर्देश

ग्वालियर के लोक सेवा प्रबंधक श्री सूरज यादव ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सभी संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश के तहत, अधिरोपित अर्थदंड (जुर्माने) की पूरी राशि को निर्धारित शासकीय मद के तहत सरकारी खजाने (कोष) में जमा कराना होगा। चालान जमा करने के बाद उसकी मूल प्रति तीन कार्यदिवसों (Working Days) के भीतर लोक सेवा प्रबंधन कार्यालय में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करनी होगी।

कलेक्टर की इस सख्त कार्रवाई से जिले के अन्य प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। इस फैसले से यह साफ संदेश गया है कि आम जनता के लोक सेवा से जुड़े आवेदनों में किसी भी प्रकार की लेत-लतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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