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करोड़ों के मान्यता घोटाले की जांच में EOW की एंट्री, संयुक्त संचालक लोक शिक्षण ग्वालियर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप…

करोड़ों के मान्यता घोटाले की जांच में EOW की एंट्री, संयुक्त संचालक लोक शिक्षण ग्वालियर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप…

              गिर्राज रजक, ग्वालियर,

ग्वालियर। लोक शिक्षण संभाग ग्वालियर में निजी स्कूलों को मान्यता एवं नवीनीकरण देने के नाम पर कथित भ्रष्टाचार की शिकायतों ने अब बड़ा रूप ले लिया है। सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने जांच प्रारंभ कर दी है। आरोपों के केंद्र में वर्तमान संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संभाग ग्वालियर हैं, जिन पर नियमों को दरकिनार कर स्कूलों को मान्यता देने और नवीनीकरण करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

शिकायतों में दावा किया गया है कि सत्र 2025-26 के दौरान मान्यता नवीन एवं नवीनीकरण के लिए ₹50 हजार से ₹70 हजार तक की कथित अवैध वसूली की गई। सूत्रों का आरोप है कि पिछले एक वर्ष में इस प्रक्रिया के माध्यम से करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया।

मध्यप्रदेश शासन की 31 मार्च 2017 की अधिसूचना में हायर सेकेंडरी विद्यालयों के लिए न्यूनतम एक एकड़ भूमि सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं का प्रावधान है। आरोप है कि ग्वालियर संभाग में बड़ी संख्या में ऐसे विद्यालयों को भी मान्यता एवं नवीनीकरण प्रदान कर दिया गया जिनके पास न पर्याप्त भूमि है, न खेल मैदान, न प्रयोगशालाएं और न ही पर्याप्त प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध हैं।

गुना जिले के एक विद्यालय के संबंध में भी नियम उल्लंघन की शिकायत की गई थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और मामले को दबाने का प्रयास किया गया। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को कमजोर करने वाला गंभीर मामला माना जाएगा।

सूत्रों का यह भी दावा है कि संयुक्त संचालक के विरुद्ध पूर्व में अनुकंपा नियुक्तियों से जुड़े मामलों की जांच भी लंबित रही है। आरोप है कि बिना स्वीकृत पदों के 23 अनुकंपा नियुक्तियां किए जाने के मामले में भी जांच की मांग उठ चुकी है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी शेष है।

शिक्षा जगत में अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर बार-बार शिकायतें सामने आने के बावजूद ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। क्या विभागीय स्तर पर किसी प्रकार का संरक्षण प्राप्त है? क्या भोपाल में बैठे वरिष्ठ अधिकारी और जिम्मेदार विभागीय तंत्र इस पूरे मामले पर संज्ञान लेंगे?

चम्बल ब्रेकिंग ने संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संभाग ग्वालियर का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया। फोन की घंटी लगातार बजती रही, लेकिन कॉल रिसीव नहीं की गई। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

अब निगाहें EOW की जांच और राज्य शासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो यह मामला प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े एक बड़े शिक्षा घोटाले के रूप में सामने आ सकता है।

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