ग्वालियर में ‘स्वामित्व योजना’ को लेकर जिला प्रशासन सख्त: कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर मैदान में उतरे एडीएम और एसडीएम; गांवों का दौरा कर दिए तेजी के निर्देश

ग्वालियर: ग्रामीण अंचलों में नागरिकों को उनकी आवासीय संपत्तियों का मालिकाना हक दिलाने वाली केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्वामित्व योजना’ के क्रियान्वयन को लेकर ग्वालियर जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। योजना के अंतर्गत बचे हुए सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा कराने के लिए जिले में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी सिलसिले में शनिवार (30 मई 2026) को कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान के कड़े रुख के बाद जिले के तमाम वरिष्ठ प्रशासनिक और राजस्व अधिकारी खुद मैदानी हकीकत जानने ग्रामीण क्षेत्रों के दौरों पर निकले।
वरिष्ठ अधिकारियों ने संभाली कमान; चीनोर-दादोर सहित कई गांवों का औचक निरीक्षण
कलेक्टर के निर्देश पर अपर कलेक्टर, एडीएम और एसडीएम स्तर के अधिकारियों ने विभिन्न विकासखंडों का सघन दौरा किया:
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पोर्टल पर कराईं प्रविष्टियां: अपर जिला दण्डाधिकारी (ADM) श्री सी बी प्रसाद और अपर कलेक्टर श्री कुमार सत्यम ने चीनोर, रिछारी कला, हथनोरा, करई और दादोर सहित कई दूरस्थ ग्रामों का सघन भ्रमण किया। अधिकारियों ने मौके पर जाकर स्वामित्व योजना के तहत तैयार डिजिटल नक्शों का मिलान किया, राजस्व अभिलेखों (रिकॉर्ड) की गहन जांच की और पेंडिंग पड़े डाटा की पोर्टल पर ऑन-द-स्पॉट प्रविष्टियां सुनिश्चित कराईं।
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अनुभागवार सघन मॉनिटरिंग: इसी तरह एडीएम लश्कर श्री नरेंद्र बाबू यादव, एसडीएम घाटीगाँव श्रीमती वंदना जैन सहित अन्य अनुविभागीय अधिकारियों और तहसीलदारों ने भी अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में मुस्तैदी दिखाते हुए रुके हुए कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
‘लापरवाही बर्दाश्त नहीं, समय पर मिले मालिकाना हक’: कलेक्टर
कलेक्टर की सख्त हिदायत: कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने सभी राजस्व अधिकारियों को दोटूक शब्दों में निर्देश जारी किए हैं कि स्वामित्व योजना के कार्यों में किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि नक्शों का भौतिक सत्यापन, दस्तावेजों का सूक्ष्म परीक्षण और ऑनलाइन एंट्री का काम त्रुटिहीन व पारदर्शी होना चाहिए। पात्र ग्रामीण हितग्राहियों को उनके कानूनी दस्तावेज समय पर सौंपना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है ‘स्वामित्व योजना’?
यह योजना ग्रामीण भारत के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है:
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ड्रोन आधारित डिजिटल रिकॉर्ड: योजना के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र का आधुनिक ड्रोन कैमरों के माध्यम से सटीक सर्वेक्षण किया जाता है। इसके आधार पर संपत्तियों के डिजिटल और वैधानिक रिकॉर्ड (प्रॉपर्टी कार्ड) तैयार किए जाते हैं।
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जमीन विवादों का अंत: ग्रामीणों को उनकी जमीन और मकान का कानूनी मालिकाना हक (स्वामित्व अभिलेख) मिलने से पीढ़ियों से चले आ रहे आपसी जमीन विवादों और मुकदमों में भारी कमी आ रही है।
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आर्थिक मजबूती: इन वैधानिक दस्तावेजों के आधार पर अब ग्रामीण नागरिक भी शहरों की तर्ज पर अपने मकानों पर बैंकों से आसानी से लोन (ऋण) और अन्य वित्तीय सुविधाएं प्राप्त कर पा रहे हैं। इसके साथ ही गांवों में एक व्यवस्थित भू-अभिलेख व्यवस्था सुदृढ़ हो रही है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को उसकी संपत्ति का अधिकार समय पर दिलाने के लिए इस पूरी प्रक्रिया की साप्ताहिक और नियमित मॉनिटरिंग लगातार जारी रहेगी।




