दो माह से MITS में बंदूकधारी गार्ड्स – बाउंसरों की तैनाती और बाहरी लड़कों का प्रवेश वर्जित, फिर संस्थान के अंदर कैसे आए बाहरी लड़के प्रबंधन के पास नहीं कोई जवाब आनन फानन में कुछ पीड़ित छात्र सस्पेंड कर झाड़ा पल्ला…

दो माह से MITS में बंदूकधारी गार्ड्स – बाउंसरों की तैनाती और बाहरी लड़कों का प्रवेश वर्जित, फिर संस्थान के अंदर कैसे आए बाहरी लड़के प्रबंधन के पास नहीं कोई जवाब आनन फानन में कुछ पीड़ित छात्र सस्पेंड कर झाड़ा पल्ला…
एकतरफ जहां एमआईटीएस में आरके पंडित की बतौर कथित कुलगुरु की नियुक्ति विवादग्रस्त बनी हुई है वहीं उनके द्वारा आर्थिक अनियमितताओं और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर भी शिकायतों के बाद केंद्रीय तथा राज्य स्तरीय जांच एजेंसियों के समक्ष प्रकरण जारी है यही नहीं कथित कुलगुरु के आगे पीछे घूम घूमकर जी हजूरी कर जिम्मेदार पद पर बैठे लोंग भी कम नहीं हैं।
19 अगस्त को एमआईटीएस में नवीन शैक्षणिक सत्र की शुरुआत नव प्रवेशित छात्रों के लिए आयोजित इंडक्शन प्रोग्राम के तहत कॉलेज परिसर के अंदर मुख्य ग्राउंड में क्लब कार्निवाल पर थोड़ी बहुत मामूली कहासुनी को लेकर छात्रों के दो गुटों में लात घूंसों की बरसात में बदल गई। मौके पर खड़े डीन स्टूडेंट वेलफेयर मनीष सागर और प्रवेश समिति के चेयरमैन मनीष दीक्षित भी बीच बचाव करते करते इस मारपीट की चपेट में आ गए जिसका कि वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से बहुप्रसारित हो रहा है।
इस प्रकरण में एमआईटीएस में संस्थान स्तर पर प्रबंधन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी संस्था के पक्ष को रखते हुए अजीबो गरीब बयान देने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं जिससे मामला और अधिक गंभीर होता जा रहा है।
एक तरफ दैनिक भास्कर को दिए वक्तव्य में स्वयं को संस्थान का जनसंपर्क अधिकारी बताने वाले मुकेश मौर्य ने दावा किया कि यह मारपीट की घटना संस्थान के मुख्य परिसर से बाहर की है जबकि बहुप्रदारित वीडियो में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि घटना संस्थान परिसर के अंदर मुख्य ग्राउंड में घटित हुई है। गौरतलब है कि श्री मुकेश मौर्य अजाक्स के प्रांताध्यक्ष है
वहीं मीडिया के समक्ष पक्ष रहते हुए डीन स्टूडेंट एडमिनिस्ट्रेशन डॉक्टर आरएस जादौन ने कहा कि मारपीट की घटना से जुड़े बहुप्रसारित वीडियो में उपद्रव करते देखे जा रहे लड़को में कुछ लड़के बाहरी भी है संस्थान स्तर पहचान कर संस्थान कड़ी कार्रवाई करेगा।
दो जिम्मेदार अधिकारियों के दो अलग अलग बयान सामने आने से मामला तूल पकड़ रहा है संस्थान में 16 जून को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा किए गए धरने प्रदर्शन के बाद सेक्यूरिटी व्यवस्था को दुरुस्त करते हुए संपूर्ण परिसर में जहां बंदूकधारी सेक्यूरिटी गार्ड्स तैनात कर दिए गये थे वहीं सेक्यूरिटी कंपनी का स्वयं का सेक्यूरिटी सुपरवाइजर होते हुए भी जी हजूरी करने वाले चहेते सेवानिवृत कर्मचारी श्री पीपली को पुनर्नियुक्ति देते हुए सिक्योरिटी इंचार्ज बनाया गया था और फैकल्टी स्टाफ तक को अंदर आने के लिए आईडी कार्ड पहनकर आना अनिवार्य किया गया था वहीं छात्रों के आईडी कार्ड देखकर ही उन्हें परिसर के अंदर प्रवेश दिया जाने लगा है यहां तक कि संस्थान के कथित वीसी और उनकी पत्नी प्रो वीसी ने स्वयं के लिए बंगले से कार्यालय तक आने के लिए बॉडी बिल्डर बाउंसरों को अपने आगे पीछे तैनात कर लिया है। अब सवाल तो यह है कि संस्थान की इतनी चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था को भेदकर बाहरी लड़के संस्थान में प्रवेश कैसे पा गए ?
गौरतलब है कि यह डॉक्टर आर एस जादौन वही डीन स्टूडेंट एडमिनिस्ट्रेशन है जिनके द्वारा संविधान में सिर्फ जिला स्तर पर कलेक्टर और तहसील स्तर पर एसडीएम को प्राप्त शक्तियों का भूलवश उपयोग संस्थान में करते हुए भारतीय न्याय संहिता 163 (पूर्व धारा 144) किया गया था जिसका कि उन्हें कहीं से कहीं तक अधिकार नहीं था गनीमत है कि इस मामले में स्थानीय प्रशासन ने उन पर वैधानिक कार्रवाई नहीं की है लेकिन जब छात्रों ने इस पर आपत्ति उठाई और राज्यपाल तक भी इस बात की शिकायत की गई तब जाकर आनन फानन में डीन स्टूडेंट एडमिनिस्ट्रेशन ने अपनी गलती को स्वीकार किया और संशोधित आदेश जारी किया गया था।
19 अगस्त को हुई मारपीट से जुड़े मामले में आज 21 अगस्त को करवाई करते हुए कुछ छात्रों की सस्पेंड करने की बात सामने आ रही है हालांकि सस्पेंड किए गए अधिकतर छात्र वह है जो बेचारे स्वयं को पीड़ित बता रहे है और घटना से जुड़े वीडियो में पिटाई खाते दिख रहे है।
ऐसे में एक बड़ा सवाल यह है कि हर बार छात्रों पर तो कार्रवाई कर डर का माहौल छात्रों में बनाने का प्रयास किया जाता है लेकिन अब तक उच्च प्रबंधन ने अपात्र होते हुए भी जिम्मेदार बने बैठे, अनियमितताओं को अंजाम देने वाले साहब और साहिबा और शासकीय नियमों को तोड़मरोड़कर संस्था के कार्यरत कर्मचारियों पर थोपने वाले उनका शोषण करने वाले और संविधान से भी छेड़छाड़ करने वाले साहब साहिबा के नवरत्न जिम्मेदार अधिकारियों पर आजतक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, इसका जवाब कौन देगा। उल्लेखनीय है कि संस्थान के उच्च प्रबंधन की कमान ग्वालियर के सिंधिया राजपरिवार के हाथ में है।
कुल मिलाकर संस्थान स्तर पर कमान थामकर बैठे अपात्र कथित कुलगुरु और उनसे जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों की कार्य कुशलता सिर्फ अनियमितताओं में दिखाई देती है। लेकिन जमाना टकटकी लगाकर महल की ओर देख रहा है कि कब महल की मिट्टी पलीत करा रहे संस्था स्तर पर सेवानिवृत्ति उपरांत भी अपात्र होते हुए जिम्मेदार पति पत्नी को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।



