ग्वालियर: गांजा तस्करी में फंसा पुलिस आरक्षक; दो साल चली कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने भेजा सलाखों के पीछे

ग्वालियर (मध्य प्रदेश)। “नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ी को बर्बाद करता है। सबसे ज्यादा पीड़ा तब होती है, जब कानून की रक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाला ही नशे की तस्करी में शामिल मिले।” यह बात जिला न्यायालय के अपर लोक अभियोजक (Public Prosecutor) धर्मेंद्र कुमार शर्मा ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण मामले में सफलता मिलने के बाद कही।
ग्वालियर जिला अदालत ने पुलिस विभाग के ही एक आरक्षक (कॉन्स्टेबल) और उसके साथी को 15 किलोग्राम गांजे की तस्करी का दोषी पाते हुए दो-दो साल के सश्रम कारावास (जेल) की सजा सुनाई है। करीब दो साल तक चली लंबी और पेचीदा न्यायिक प्रक्रिया के बाद आखिरकार दोनों आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया।
वाहनों की चेकिंग के दौरान खुला था तस्करी का राज
यह पूरा मामला 20 फरवरी 2023 का है, जब कानून के रखवाले ही कानून तोड़ते हुए रंगे हाथों पकड़े गए थे:
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टेकनपुर चौकी पर घेराबंदी: घटना के दिन डबरा थाना क्षेत्र की टेकनपुर चौकी पर उपनिरीक्षक (SI) देवेंद्र लोधी अपनी पुलिस टीम के साथ सिंध नदी पुल के पास रूटीन चेकिंग कर रहे थे।
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15 किलो गांजा बरामद: वाहनों की नियमानुसार जांच के दौरान एक संदिग्ध वाहन को रोका गया। जब उसकी तलाशी ली गई, तो पुलिस टीम के होश उड़ गए। वाहन से भारी मात्रा में (कुल 15 किलोग्राम) अवैध गांजा बरामद किया गया।
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आरक्षक ही निकला तस्कर: चौंकाने वाली बात यह थी कि इस तस्करी रैकेट का मुख्य सूत्रधार कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि पुलिस विभाग का ही एक आरक्षक निकला, जो अपने एक साथी के साथ मिलकर इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहा था।
अभियोजन पक्ष के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था यह केस
अपर लोक अभियोजक धर्मेंद्र कुमार शर्मा के मुताबिक, यह मामला उनके करियर के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण मुकदमों में से एक था:
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समाज का टूटता भरोसा: जब पुलिस का ही कोई जवान ऐसे गंभीर अपराधों में लिप्त पाया जाता है, तो जनता का सिस्टम पर से विश्वास उठने लगता है। इसलिए इस केस में आरोपियों को सजा दिलाना बेहद जरूरी था।
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मजबूत पैरवी से मिली सफलता: आरोपी के पुलिस बैकग्राउंड में होने के कारण कानूनी बारीकियों और गवाहों को प्रभावित करने का जोखिम हमेशा बना रहता था। इसके बावजूद अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने अकाट्य वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाह पेश किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया।
केस फाइल: एक नजर में
| मुख्य बिंदु | विवरण व आंकड़े |
| घटना की तारीख | 20 फरवरी 2023 |
| फैसले की तारीख | 10 जुलाई 2026 |
| घटनास्थल | टेकनपुर चौकी, सिंध नदी पुल के पास (डबरा, ग्वालियर) |
| बरामदगी | 15 किलोग्राम अवैध गांजा |
| अदालत का फैसला | दोनों दोषियों को 2-2 साल की जेल |
| मुख्य आरोपी का बैकग्राउंड | मध्य प्रदेश पुलिस का आरक्षक (कॉन्स्टेबल) |
अदालत का कड़ा संदेश: जिला अदालत ने फैसला सुनाते हुए साफ किया कि नशीले पदार्थों की तस्करी समाज की जड़ों को खोखला कर रही है। खासकर युवाओं को नशे के जाल से बचाना आज के समय की सबसे बड़ी सामाजिक जरूरत है। ऐसे में यदि कोई लोक सेवक या पुलिसकर्मी खुद इस अवैध धंधे का हिस्सा बनता है, तो उसके प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। इस फैसले से समाज में एक कड़ा और सकारात्मक संदेश जाएगा।



