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एमपी में ‘वीबी-जीरामजी’ योजना का शंखनाद: अब ग्राम सभाएं खुद तय करेंगी गांव का भाग्य, 125 दिन के रोजगार के साथ पक्के निर्माण को हरी झंडी

भिंड। मध्य प्रदेश के ग्रामीण अंचलों के विकास को एक नई और आत्मनिर्भर दिशा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘वीबी – जीरामजी योजना’ (VB-G RAM G scheme) को प्रदेश भर में लागू कर दिया गया है। भिंड जिले की सभी 426 ग्राम पंचायतों सहित पूरे सूबे में इस योजना के जमीनी क्रियान्वयन को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। पंचायती राज व्यवस्था के इतिहास में यह पहली बार होने जा रहा है, जब ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र के विकास कार्य और प्राथमिकताओं को स्वयं तय करने का पूर्ण अधिकार दिया गया है। इसके साथ ही योजना के तहत ग्रामीणों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी भी दी जा रही है।

अब थोपी नहीं जाएगी योजना, ग्राम सभाएं खुद चुनेंगी एजेंडा

अब तक की व्यवस्था के अनुसार, ग्राम पंचायतों में विकास कार्य शासन स्तर (भोपाल या दिल्ली) से तय गाइडलाइंस और प्राथमिकताओं के आधार पर ही कराए जाते थे। लेकिन नई व्यवस्था ने इस ढर्रे को पूरी तरह बदल दिया है:

  • स्थानीय स्तर पर चयन: अब गांव की स्थानीय जरूरतों के आधार पर वहां के सरपंच, सचिव और पंच सीधे ग्राम सभाओं में बैठकर विकास कार्यों का खाका तैयार करेंगे।

  • प्राथमिकता तय करने की छूट: गांव अपनी जरूरत के हिसाब से सीसी रोड, नालियां, मुक्तिधाम, तालाब जीर्णोद्धार, खेल मैदान और सामुदायिक भवनों के निर्माण का चयन खुद कर सकेंगे।

सबसे बड़ा बदलाव: ‘पक्के निर्माण’ कार्यों को भी मिली मंजूरी

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कच्चे कार्यों (जैसे मिट्टी-मुरम की सड़कें या केवल खुदाई) के अलावा पक्के निर्माण कार्यों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी और स्थाई इंफ्रास्ट्रक्चर (आधारभूत सुविधाओं) के विस्तार को अभूतपूर्व गति मिलने की उम्मीद है।

भिंड में सरगर्मी तेज, 65 से ज्यादा पंचायतों ने भेजे प्रस्ताव

योजना को लेकर जमीनी स्तर पर भारी उत्साह देखा जा रहा है। जिला पंचायत भिंड के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, जिले की पंचायतों ने अपने स्तर पर बैठकें कर प्रस्ताव तैयार करना शुरू कर दिया है।

  • अब तक करीब 65 से अधिक ग्राम पंचायतें अपने विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार कर जिला पंचायत मुख्यालय को भेज चुकी हैं।

  • जिला पंचायत की तकनीकी विंग इन प्रस्तावों की बारीकी से जांच और एस्टीमेट (मूल्यांकन) तैयार करने में जुटी है, ताकि बजट जारी होते ही काम शुरू कराया जा सके।

तकनीकी जांच के बाद पहले चरण के कार्यों को बजट का इंतजार

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही शासन स्तर से योजना का केंद्रीय बजट जिला पंचायतों के खातों में ट्रांसफर होगा, पहले चरण के तहत स्वीकृत किए गए सभी विकास कार्यों को धरातल पर शुरू करा दिया जाएगा। इस योजना से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों का कायाकल्प होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को 125 दिनों का सुनिश्चित रोजगार मिलने से पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी।

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