
अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भव्य राम मंदिर के चढ़ावे में कथित वित्तीय गड़बड़ी और नकदी चोरी के मामले की जांच अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की तफ्तीश में जुटी विशेष जांच दल (SIT) ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल राव पर शिकंजा कस दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एसआईटी की टीम ने इन दोनों शीर्ष अधिकारियों से लगातार दूसरे दिन कई घंटों तक मैराथन पूछताछ की है। इस दौरान जांच टीम ने ट्रस्ट के कार्यालय से कई अत्यंत महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए हैं, जिनकी बारीकी से फोरेंसिक और वित्तीय जांच की जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था और नकदी प्रबंधन को लेकर दागे गए तीखे सवाल
एसआईटी की टीम ने पूछताछ के दौरान मंदिर के आंतरिक वित्तीय ढांचे और सुरक्षा मानकों को लेकर दोनों अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ की:
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चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा: जांच एजेंसी ने मुख्य रूप से मंदिर के दानपात्रों से आने वाली नकदी की गिनती की प्रक्रिया, उसके सुरक्षित रख-रखाव के नियमों और कथित चोरी की पूरी कड़ियों को लेकर सवाल-जवाब किए।
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40 कर्मचारियों के बयान दर्ज: इस मामले की तह तक जाने के लिए एसआईटी अब तक मंदिर परिसर और ट्रस्ट से जुड़े करीब 40 छोटे-बड़े कर्मचारियों से गहन पूछताछ कर उनके आधिकारिक बयान दर्ज कर चुकी है, जिनमें से कई बयानों को केस के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
महासचिव के ड्राइवर से भी पूछताछ, नकदी हेरफेर से जुड़े मिले अहम सुराग
इस पूरे खोजी घटनाक्रम में एक नया मोड़ तब आया जब जांच की आंच अधिकारियों के करीबियों तक पहुंची:
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ड्राइवर ‘टिन्नू’ से सवाल-जवाब: सूत्रों का दावा है कि एसआईटी ने चंपत राय के निजी ड्राइवर टिन्नू को भी हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की है। इस पूछताछ में कथित तौर पर मंदिर की नकदी और डोनेशन के परिवहन (Transportation) व प्रबंधन से जुड़े कुछ बेहद चौंकाने वाले और महत्वपूर्ण तथ्य हाथ लगे हैं।
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आधिकारिक पुष्टि का इंतजार: हालांकि, जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए एसआईटी और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने अभी तक किसी भी निष्कर्ष या बड़े खुलासे की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है।
तीन थानों में एफआईआर दर्ज, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं होने पर उठे सवाल
देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में पुलिस और प्रशासन की सुस्त रफ्तार को लेकर भी अब सवाल खड़े होने लगे हैं:
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गिरफ्तारी नहीं होने से संशय: हैरानी की बात यह है कि चढ़ावे में धांधली को लेकर अयोध्या के तीन अलग-अलग थानों में आपराधिक शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं, लेकिन इतनी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज होने और मैराथन पूछताछ के बावजूद अभी तक एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
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सियासी और सामाजिक हलचल तेज: राम मंदिर जैसे सर्वोच्च धार्मिक स्थल से जुड़े इस कथित घोटाले ने देश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी भारी हलचल पैदा कर दी है। सूत्रों की मानें तो आने वाले कुछ दिनों में एसआईटी की यह आक्रामक जांच कई रसूखदार चेहरों को बेनकाब कर सकती है और इस मामले में बड़ी कानूनी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।



