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डबरा में ‘साथी हाथ बढ़ाना’ संगठन की सराहनीय पहल: चांदपुर गौशाला का बदला स्वरूप; गौसेवा के साथ पक्षियों के लिए लगाए सकोरे

डबरा (ग्वालियर): सामाजिक सरोकारों और जनकल्याण के कार्यों में अग्रणी रहने वाली संस्था ‘साथी हाथ बढ़ाना सामाजिक संगठन’ ने भीषण गर्मी के इस दौर में जीव-दया की एक अनूठी मिसाल पेश की है। गुरुवार, 11 जून 2026 को संगठन के कार्यकर्ताओं ने अपनी दैनिक सेवा गतिविधि के तहत चांदपुर गौशाला पहुंचकर न केवल गोवंश की सेवा सुश्रूषा की, बल्कि चिलचिलाती धूप और उमस को देखते हुए बेजुबान पक्षियों के लिए भी पानी के सकोरे (मिट्टी के जल पात्र) बांधकर पेयजल की पुख्ता व्यवस्था की।

आदर्श और आत्मनिर्भर गौशाला बनाने का संकल्प, समाज से सहयोग की अपील

अभियान के दौरान संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने पूरी गौशाला का बारीकी से निरीक्षण किया और इसके भविष्य के रखरखाव व विकास को लेकर एक विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की। संस्था के सक्रिय सदस्य महेंद्र सिंह तोमर (चिंटू) ने बताया कि उनका मुख्य लक्ष्य चांदपुर गौशाला को क्षेत्र की सबसे आदर्श, सर्वसुविधायुक्त और आत्मनिर्भर गौशाला के रूप में विकसित करना है। उन्होंने डबरा के स्थानीय नागरिकों, प्रबुद्ध जनों, समाजसेवियों और गोभक्तों से आह्वान किया है कि वे समय-समय पर यहाँ आकर श्रमदान करें, गोवंश के लिए चारा-भूसा सामग्री दान करें और इस पुनीत कार्य में अपना यथासंभव आर्थिक व मानसिक सहयोग प्रदान करें।

कब्रिस्तान जैसी हो गई थी हालत, इसलिए संगठन को संभालनी पड़ी कमान

डबरा नगर पालिका के अधीन संचालित होने वाली इस सरकारी गौशाला की जिम्मेदारी एक निजी सामाजिक संगठन को अपने हाथों में क्यों लेनी पड़ी? इस गंभीर सवाल का जवाब देते हुए महेंद्र सिंह तोमर (चिंटू) ने गौशाला के अतीत के कड़वे सच से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया:

“एक दौर ऐसा भी था जब प्रशासनिक उदासीनता और घोर लापरवाही के चलते चांदपुर गौशाला की स्थिति अत्यंत दयनीय और नारकीय हो चुकी थी। पर्याप्त चारे-पानी और उचित देखरेख के अभाव में यहाँ दर्जनों गोवंशों ने भूख और प्यास से तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया था। आलम यह था कि यह पवित्र गौशाला एक कब्रिस्तान के रूप में तब्दील होती जा रही थी। गोवंश की इस दुर्दशा को हमसे देखा नहीं गया, जिसके बाद हमारे संगठन ने इस बेसहारा गोवंश के संरक्षण और गौशाला को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया।”

 जनसहयोग और कड़े प्रबंधन से बदली गौशाला की तस्वीर

संगठन के सदस्यों का दावा है कि उनके द्वारा कमान संभालने के बाद से, निरंतर नि:स्वार्थ सेवा, बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन और दानदाताओं के सहयोग के बल पर आज चांदपुर गौशाला की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। यहाँ अब गोवंश के लिए पर्याप्त चारे, पानी और छांव की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। संगठन ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल गोवंश की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वे इसके माध्यम से समाज में पर्यावरण संरक्षण, पक्षियों और अन्य मूक जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता और करुणा की भावना को जगाना चाहते हैं।

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