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ग्वालियर में जल गंगा संवर्धन अभियान का चमत्कार: 15 साल से सूखे कुएं हुए लबालब, खेत तालाब से बदली किसान मोहन सिंह की किस्मत

ग्वालियर जिले से जल संरक्षण और ग्रामीण विकास की एक बेहद सुखद और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। गिरते भू-जल स्तर के कारण जिन खेतों में पिछले 15 वर्षों से सूखा पड़ा था, आज वहाँ ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की बदौलत फसलें लहलहा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इस महत्वाकांक्षी पहल ने एक लाचार किसान की मुरझाई आंखों में खुशी के आंसू ला दिए हैं। यह जमीनी बदलाव ग्वालियर की जनपद पंचायत भितरवार के ग्राम पंचायत धिरौली से सामने आया है।

15 साल का लंबा इंतजार और मनरेगा से मिला ‘संजीवनी’ तालाब

धिरौली गाँव के रहने वाले किसान मोहन सिंह यादव पिछले डेढ़ दशक से पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे थे। लगातार गिरते वॉटर लेवल के कारण उनके खेत का कुआं पूरी तरह सूख चुका था और बोरवेल भी दम तोड़ रहे थे। साल भर में एक फसल उगाना भी उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा था।

किसान की इस बदहाली को दूर करने के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में मोहन सिंह के खेत पर 4.50 लाख रुपये की लागत से एक खेत तालाब को मंजूरी दी गई। पिछले साल जून में यह तालाब बनकर तैयार हुआ और मानसून की पहली ही बारिश में पानी से लबालब भर गया।

भू-जल स्तर सुधरा, कुओं और बोरवेल में लौट आया पानी

इस खेत तालाब के बनने से जो चमत्कार हुआ, उसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया। तालाब में पानी रुकने के कारण आस-पास की जमीन का वॉटर रीचार्ज हुआ, जिससे पिछले 15 वर्षों से सूखे पड़े कुओं और निष्प्राण हो चुके बोरवेल का जल स्तर अचानक ऊपर आ गया। अपने सूखे कुएं में फिर से पानी देखकर मोहन सिंह की आंखें खुशी से छलक उठीं। पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होने से खेती को लेकर उनकी सारी चिंताएं हमेशा के लिए खत्म हो गईं।

 अब एक नहीं बल्कि दो फसलें, सब्जी और फूलों की खेती से बढ़ी आय

पानी का संकट दूर होते ही मोहन सिंह के खेतों की सूरत बदल गई है। अब वे साल में सिर्फ एक बेजान फसल के भरोसे नहीं हैं, बल्कि अपने खेतों से दो-दो मुख्य फसलें ले रहे हैं। इसके साथ ही वे नगदी फसलों के रूप में सब्जियों और फूलों की खेती भी कर रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी में भारी इजाफा हुआ है।

इस तालाब का लाभ केवल मोहन सिंह को ही नहीं, बल्कि भीषण गर्मी में भटकने वाले स्थानीय पशु-पक्षियों को भी मिल रहा है। धिरौली गाँव का यह सफल प्रयोग अब आस-पास के अन्य किसानों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा बन गया है और वे भी अपने खेतों में जल संरक्षण के लिए तालाब निर्माण की योजना बना रहे हैं।

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