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Gwalior : अचलेश्वर महादेव मंदिर में विराजे 200 किलो के ‘नंदी महाराज’: अलीगढ़ में बनी पीतल की प्रतिमा की हुई प्राण-प्रतिष्ठा

ग्वालियर। अंचल के सुप्रसिद्ध और ऐतिहासिक अचलेश्वर महादेव मंदिर में रविवार, 10 मई 2026 को एक भव्य धार्मिक अनुष्ठान के साथ भगवान भोलेनाथ के परम भक्त नंदी महाराज की नई प्रतिमा स्थापित की गई। गर्भगृह में स्थापित की गई यह भव्य प्रतिमा लगभग 200 किलोग्राम वजनी है, जिसे विशेष रूप से अलीगढ़ के कुशल कारीगरों द्वारा पीतल से तैयार किया गया है।


तीन दिवसीय अनुष्ठान के साथ हुई प्राण-प्रतिष्ठा

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, नंदी महाराज की स्थापना का यह कार्यक्रम पूरे विधि-विधान और उत्सव की तरह संपन्न हुआ।

  • विसर्जन: पुराने नंदी महाराज को 8 मई को मंत्रोच्चार के साथ ससम्मान विसर्जित किया गया।

  • अनुष्ठान: पांच आचार्यों द्वारा तीन दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए गए।

  • स्थापना: 10 मई को प्राण-प्रतिष्ठा का मुख्य कार्यक्रम पूर्ण हुआ, जिसमें श्रीमती वंदना दिलीप जैसवानी को मुख्य यजमान के रूप में पूजा कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

200 किलो वजनी पीतल की प्रतिमा का वैभव

श्रद्धालुओं की सर्वसम्मति और सहयोग से तैयार कराई गई यह प्रतिमा शिल्प कला का अनूठा उदाहरण है। नंदी बाबा की मुख्य प्रतिमा का वजन लगभग 120 किलोग्राम है, जबकि अन्य सामग्रियों और आधार को मिलाकर इसका कुल वजन करीब 200 किलोग्राम तक पहुँच गया है। इस अवसर पर मंदिर परिसर को भव्य फूल बंगला सजाकर दुल्हन की तरह सजाया गया, जहाँ महाआरती के बाद भक्तों को प्रसादी का वितरण किया गया।

धार्मिक महत्व: नंदी के कान में गुहार और भोलेनाथ का आशीर्वाद

मंदिर के पुजारी गौरव कटारे ने इस अवसर पर नंदी महाराज के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नंदी को धर्म का प्रतीक और भगवान शिव का सबसे प्रिय भक्त माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, नंदी के बिना भगवान शिव का दर्शन अधूरा माना जाता है। मान्यता है कि नंदी के कान में कही गई बात सीधे महादेव तक पहुँचती है, इसीलिए श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए नंदी महाराज से आज्ञा लेकर ही गर्भगृह में प्रवेश करते हैं।

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