Gwalior : भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा ₹1300 करोड़ का ड्रीम प्रोजेक्ट? एलिवेटेड रोड का 35 फीट लंबा गर्डर गिरा, सिस्टम पर उठे सवाल

ग्वालियर: शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के नाम पर ₹1300 करोड़ की लागत से बन रहा एलिवेटेड कॉरिडोर अब लोगों के लिए डर का कारण बनता जा रहा है। गुरुवार दोपहर खेड़ापति कॉलोनी के पास निर्माणाधीन रोड का एक भारी-भरकम 35 फीट लंबा गर्डर अचानक भरभरा कर गिर गया। इस हादसे में एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हुआ है, लेकिन यह घटना भविष्य में होने वाले किसी बड़े खतरे की आहट दे गई है।
तैयार होने से पहले ही ढहने लगा पुल: विकास या विनाश?
स्वर्ण रेखा नदी के ऊपर बन रहे इस कॉरिडोर को ग्वालियर का ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ बताया जा रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। पुल अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुआ है और इसका हिस्सा गिरना निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन क्या सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं?
भ्रष्टाचार और लापरवाही की आशंका
दोपहर करीब 4 बजे हुए इस हादसे ने आसपास के रहवासियों को दहशत में डाल दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जिस वक्त गर्डर गिरा, उसकी आवाज इतनी तेज थी कि लगा जैसे कोई धमाका हुआ हो। स्थानीय लोगों का आरोप है कि काम में जल्दबाजी और घटिया सामग्री का उपयोग इस हादसे की मुख्य वजह हो सकता है। सरकार और प्रशासन बड़े दावों के साथ प्रोजेक्ट का प्रचार कर रहे हैं, लेकिन निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी स्पष्ट रूप से नजर आ रही है।
सरकार की चुप्पी और गिरती साख
इतने बड़े हादसे के बाद भी जिम्मेदारों की ओर से कोई ठोस स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। क्या सरकार इस घटना की निष्पक्ष जांच कराएगी? या फिर हर बार की तरह मामले को लीपापोती कर दबा दिया जाएगा? एक मजदूर की जान जोखिम में पड़ना और सरकारी संपत्ति का नुकसान होना यह दर्शाता है कि मॉनिटरिंग के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। अगर व्यस्ततम समय में यह गर्डर किसी राहगीर पर गिरता, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता?



