विधानसभा में गरजा सत्ता-विपक्ष टकराव, शब्दों की मर्यादा टूटी, सियासत में उबाल…
विधानसभा में गरजा सत्ता-विपक्ष टकराव, शब्दों की मर्यादा टूटी, सियासत में उबाल…
मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का चौथा दिन सियासी टकराव, तीखे आरोप-प्रत्यारोप और गरम शब्दों की वजह से सुर्खियों में आ गया। सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच बहस इस कदर भड़की कि माहौल असहज हो गया और हालात संभालने के लिए मुख्यमंत्री को खुद हस्तक्षेप कर माफी तक मांगनी पड़ी।
मामला उस वक्त भड़का जब विपक्ष की ओर से सरकार और Adani Group के बीच हुए समझौतों को लेकर सवाल उठाए गए। आरोपों के जवाब में प्रमाण मांगने और दस्तावेज पेश करने को लेकर बहस तेज हुई और देखते ही देखते व्यक्तिगत टिप्पणियों तक पहुंच गई। इसी दौरान तीखे शब्दों का इस्तेमाल हुआ, जिसने पूरे सदन का तापमान बढ़ा दिया…
सदन में गरमी, शब्दों की मर्यादा पर सवाल…
तीखी बहस के बीच सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए। आरोप-प्रत्यारोप की इस लड़ाई में भाषा की मर्यादा टूटती दिखी। विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया तो सत्ता पक्ष ने भी पलटवार किया। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि सदन की कार्यवाही का फोकस मुद्दों से हटकर व्यवहार और भाषा पर आ गया…
बाद में स्थिति बिगड़ती देख मंत्री ने खुद दुःख जताया और कहा कि वह अपने व्यवहार से संतुष्ट नहीं हैं, गुस्से में बात निकल गई। उन्होंने यह भी माना कि बहस के दौरान तनाव चरम पर था और संयम टूट गया।
मुख्यमंत्री को, आगे आना पड़ा…
घटना के बाद सदन में सियासी नुकसान को भांपते हुए मुख्यमंत्री को बीच में आना पड़ा और सभी की ओर से खेद जताते हुए माहौल शांत करने की कोशिश की। सत्ता और विपक्ष दोनों ने सुर नरम किए और विकास के मुद्दों पर साथ काम करने की बात कही, लेकिन राजनीतिक तकरार की चिंगारी बुझी नहीं…
अध्यक्ष की, सख्त टिप्पणी…
विधानसभा अध्यक्ष ने भी पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि गुस्सा दिख सकता है, लेकिन शब्दों में नहीं दिखना चाहिए। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री Sundarlal Patwa की सीख याद दिलाते हुए सदन की गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया…
राजनीतिक गलियारों में, चर्चा तेज…
घटना के बाद Indore से लेकर राजधानी तक राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सत्ता और विपक्ष के बीच इतनी तल्खी क्यों बढ़ रही है कि बात व्यक्तिगत टिप्पणी तक पहुंच रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक बहस नहीं, बल्कि भीतर ही भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान का संकेत है। बार-बार तीखे बयान और गुस्से का सार्वजनिक प्रदर्शन यह दिखाता है कि सियासी दबाव और अंदरूनी असंतोष अब मंच पर खुलकर सामने आने लगा है…
मुद्दा खत्म नहीं, सियासत गर्म…
सदन में माफी और सफाई के बाद मामला भले शांत होता दिखे, लेकिन राजनीतिक तापमान अभी भी ऊंचा है। विपक्ष इसे सत्ता का अहंकार बता रहा है तो सत्ता पक्ष इसे उकसावे की राजनीति कह रहा है।
एक बात साफ है—यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज सियासी बयानबाजी को जन्म देगा, क्योंकि विधानसभा के भीतर की यह झड़प अब सड़कों और मीडिया की बहस का मुद्दा बन चुकी है।




